अमेरिकी और इजराइल हमलों से बर्बाद हुए घरेलू उद्योग, समुद्री मार्ग बंद होने से आयात में भी हो रही परेशानी
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अचानक हमले कर दिए थे। इन अचानक हुए हमलों में ईरान ने पहले ही दिन अपने सर्वोच्च नेता सहित करीब चार दर्जन नेताओं और सैन्य अधिकारियों को खो दिया था। हालांकि इसके बाद अमेरिका और इजराइल यह समझ रहे थे कि वे कुछ ही दिन में ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे और युद्ध समाप्त हो जाएगा।
लेकिन हुआ इसके विपरीत ईरान ने इन दोनों देशों का जमकर सामना किया और जवाबी हमले किए। इन हमलों में अमेरिका और इजराइल की सेनाओं को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन इस संघर्ष का सबसे बुरा असर ईरान पर पड़ा है।
पहले अपने राष्ट्रप्रमुख और फिर बड़ी संख्या में अपने शीर्षस्थ नेताओं को गंवाने के बाद अब ईरान की रही-बची इकोनॉमी भी खस्ताहाल हो गई है। जंग से आहत ईरान में यह दर्द किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि ईरान के लाखों घरों की कहानी है। सेंट्रल बैंक आॅफ ईरान के ताजा आंकड़ों ने तो पूरी दुनिया को चौंका दिया है। देश में महंगाई 80 साल के शिखर पर पहुंच गई है।
43.56 अरब डॉलर पर पहुंचा भारत का वस्तु निर्यात
एक तरफ जहां फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद से पूरी दुनिया जरूरी वस्तुओं की कमी से जूझ रही है। वहीं दूसरी तरफ भारत ने इस अवधि के दौरान वस्तु निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल करते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत का वस्तु निर्यात 15 फीसदी की दर से बढ़ा है।
अप्रैल में निर्यात 13.78 फीसदी बढ़कर चार साल के उच्च स्तर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के शिपमेंट में तेजी से निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा। सरकार मई के लिए आयात और नियात के आंकड़े 15 जून को जारी कर सकती है।
ये भी पढ़ें : Share Market Live Update : सोमवार की गिरावट के बाद आज शेयर बाजार की सकारात्मक शुरुआत

