Jammu and Kashmir Cloudburst News: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में शनिवार सुबह बादल फटने की घटना से अचानक अफरा-तफरी मच गई। जिले के चटरू इलाके में बादल फटने से कई दुकानें बह गईं। पानी के तेज बहाव से कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में अभी तक किसी भी व्यक्ति की मौत की खबर नहीं है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज कुमार शर्मा से घटना की जानकारी ली और प्रभावित दुकानदारों को उचित मुआवजा देने की बात कही है।
भारी बारिश से बढ़ी परेशानी, प्रशासन अलर्ट
बादल फटने के बाद इलाके में भारी बारिश और तेज जल बहाव की स्थिति बनी। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेना शुरू कर दिया है और स्थानीय अधिकारियों को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी इलाकों में क्लाउडबर्स्ट बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि कम समय में एक सीमित क्षेत्र में बहुत अधिक बारिश होने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार क्लाउडबर्स्ट एक ऐसी अत्यधिक बारिश की घटना है जिसमें बहुत कम समय और छोटे क्षेत्र में बेहद तेज बारिश होती है।
मजबूत किए जा रहे हैं अर्ली वार्निंग सिस्टम
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि किश्तवाड़ क्षेत्र में मौसम संबंधी आपदाओं से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किया गया है। पिछले अनुभवों के बाद किश्तवाड़ और मचैल क्षेत्र में आधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (EWS) लगाए गए हैं, ताकि अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बारे में पहले से जानकारी मिल सके। इसके अलावा पाडर क्षेत्र में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) लगाने की प्रक्रिया भी चल रही है। मौसम विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय गंभीर मौसम घटनाओं के लिए मल्टी-हैजर्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिए चेतावनी जारी करते हैं।
राजौरी में भी बारिश और लैंडस्लाइड
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भी भारी बारिश के बाद स्थिति खराब हुई थी। यहां तेज बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे थन्नामंडी-डीकेजी-बुफलियाज रोड को भारी नुकसान पहुंचा। यह सड़क राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों को कश्मीर घाटी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क है। बारिश और अचानक आए फ्लैश फ्लड के कारण सड़क के कई हिस्से, कलवर्ट और पेड़ बह गए, जिसके बाद यातायात प्रभावित हुआ। जम्मू-कश्मीर समेत हिमालयी राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है।

