बोले-राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के सम्मान को लेकर मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए
Sharad Pawar, (द भारत ख़बर), मुंबई: देश में एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी को लेकर विपक्ष हमलावर है तो वहीं एक कट्टर विपक्षी नेता प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर रहा है। जी हां हम बात कर रहे है। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विपक्षी नेता शरद पवार की। विपक्षी नेता शरद पवार ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि भले ही हमारी राजनीतिक सोच पीएम मोदी से अलग हो लेकिन हमको ये नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में इंटरनेशनल लेवल पर वे भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तब सभी को साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के सम्मान को लेकर मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए। पवार पुणे स्थित लक्ष्मणराव गुट्टे रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित पूर्व राज्य और जिला पदाधिकारियों के सम्मान समारोह में बोल रहे थे।
जवाहरलाल नेहरू के सामने सवाल पूछना भूले
पवार ने कहा कि 1958 में 18 साल की उम्र में वे बारामती से पुणे आए थे, क्योंकि उस समय उनके शहर में कॉलेज नहीं था। पवार ने कहा कि उन्होंने युवा आंदोलन से राजनीति की शुरूआत की, चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के प्रमुख बने और बाद में महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
पवार ने कहा कि युवावस्था की सबसे यादगार घटनाओं में से एक पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में नेहरू से मिलने के दौरान उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े कई सवाल तैयार किए थे, लेकिन नेहरू का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि वे सब कुछ भूल गए।
इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा साझा करते हुए पवार ने कहा, सोवियत संघ के आधिकारिक दौरे के दौरान इंदिरा गांधी को लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था, मैं भारत के 40 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती हूं। अगर उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान नहीं होगा, तो मैं इसे कभी स्वीकार नहीं करूंगी।
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