पश्चिम एशिया तनाव के चलते पेट्रोल पर 18 रुपए तो डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर हो रहा नुकसान
Petrol and Diesel Prices (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया तनाव का हल न निकलने के चलते देश में तेल कंपनियों को ऊंची कीमत पर कच्चा तेल आयात करना पड़ रहा है। जिसके चलते तेल बनाने की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके चलते सभी प्रमुख तेल कंपनियों को काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 35 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके चलते तेल कंपनियों ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में काफी ज्यादा इजाफा हो सकता है। हालांकि केंद्र सरकार इस बात से इंकार कर रही है कि देश में तेल की किसी तरह की किल्लत है। तेल की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए और तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों तेल पर लगने वाली ड्यूटी भी समाप्त कर दी थी। हालांकि केंद्र सरकार कीमतों को स्थिर रखने की कोशिशों में जुटी है लेकिन तेल के दाम तेल कंपनियां ही तय करती हैं।
विधानसभा चुनाव के बाद वृद्धि संभव
बताया जा रहा है तेल कंपनियां विधानसभा चुनाव संपन्न होने की प्रतिक्षा में हैं। इसके बाद तेल की कीमतों में वृद्धि की घोषणा हो सकती है। सरकार कर सकती है पेट्रोल-डीजल कीमतों की समीक्षा कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। मार्च में हुए भारी घाटे ने जनवरी और फरवरी के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है, जिसके चलते जनवरी-मार्च तिमाही में इन कंपनियों के नुकसान में जाने की आशंका जताई जा रही है।
प्रति बैरल दाम बढ़ने पर आता है दबाव
एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो यह घाटा और बढ़ने की आशंका है। क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब 6 रुपये तक बढ़ सकता है। इंडियन आॅयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अप्रैल 2022 के बाद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मार्च तक तीनों कंपनियों का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपये था। केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद ये घटकर रोजाना लगभग 1,600 करोड़ रह गया है।

