Women Reservation Bill, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सूत्रों के अनुसार, विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पुराने महिला आरक्षण बिल को लागू करने की मांग करेगा। शनिवार को सूत्रों ने बताया कि इंडिया गठबंधन के दल पूरे देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह बात कहेंगे कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार इसकी आड़ में देश का राजनीतिक नक्शा बदलने की कोशिश कर रही है। बैठक के दौरान सभी नेताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी, और सोनिया गांधी ने अपने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मूल महिला आरक्षण बिल फिर से पेश करे सरकार : प्रियंका
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से मूल महिला आरक्षण बिल को फिर से पेश करने का आग्रह किया। यह मांग उन्होंने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 के विशेष संसदीय सत्र के दौरान लोकसभा में पारित न हो पाने के एक दिन बाद की। प्रियंका ने सरकार को चुनौती दी कि वह बिल का वह संस्करण वापस लाए जिस पर पहले व्यापक राजनीतिक सहमति बनी थी। उन्होंने कहा, केंद्र को सोमवार को ही तुरंत पुराना महिला बिल लाना चाहिए, वही बिल जिसे सभी दलों ने पारित किया था।
सोमवार को बुलाएं संसद सत्र
सोमवार को संसद सत्र बुलाएं, बिल लाएं और फिर देखते हैं कि महिला-विरोधी कौन है। हम सभी मतदान करेंगे और आपका समर्थन करेंगे। संसद द्वारा 2023 में पारित एक सौ छठा संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम), लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) आरक्षण का प्रावधान करता है।
गौरतलब है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही। यह बिल परिसीमन के माध्यम से महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा था। लंबी बहस के बाद हुए मतदान में, 298 सदस्यों ने बिल का समर्थन किया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप बिल पारित नहीं हो सका।
संवैधानिक रूप से न्यूनतम सीमा पूरा नहीं कर पाया बिल
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्टि की कि बिल पारित नहीं हो सका, क्योंकि यह संवैधानिक रूप से आवश्यक न्यूनतम सीमा को पूरा नहीं कर पाया। सरकार ने तीन आपस में जुड़े कानून पेश किए थे, जिनमें परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल थे, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बाद में कहा कि बाकी विधेयकों पर आगे काम नहीं किया जाएगा।
अमित शाह ने लगाया था यह आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इससे पहले विपक्षी पार्टियों पर एक अहम सुधार को रोकने का आरोप लगाया था, जिसका मकसद संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करते हैं। उन्होंने इस कदम को भारत की चुनावी व्यवस्था को बदलने की कोशिश बताया।
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