River raises 12 crore dollar: भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में Ather, TVS और बजाज को टक्कर देने वाली स्टार्टअप कंपनी ‘RIVER’ ने 12 करोड़ डॉलर का निवेश जुटाने की जानकारी दी है। कंपनी ने कहा कि उसने अपनी ग्रोथ के अगले चरण के लिए मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के मकसद से 12 करोड़ डॉलर जुटाए हैं।
सीरीज C राउंड में जबरदस्त कामयाबी
सीरीज C राउंड की अगुवाई भारतीय निवेशकों ‘Elev8 Venture Partners’ और ‘Claypond Capital’ ने की। इसमें ‘Singularity AMC’, ‘Anicut Capital’, ‘360 ONE Asset’, ‘JIF कैपिटल’ और ‘HDFC AMC’ के साथ-साथ मौजूदा निवेशकों ‘यामाहा मोटर’, ‘अल-फुत्तैम ग्रुप’ और ‘मित्सुई’ ने भी हिस्सा लिया।
कुल पूंजी 14.4 करोड़ डॉलर
कंपनी के फाउंडर और CEO अरविंद मणि ने बताया कि इस राउंड में 10% से 12% से भी कम हिस्सा वेंचर डेट का था और जुटाई गई इक्विटी फंडिंग पूरी तरह से प्राइमरी कैपिटल थी। इसमें कोई सेकेंडरी शेयर बिक्री शामिल नहीं थी। इस राउंड के साथ, River द्वारा जुटाई गई कुल पूंजी 14.4 करोड़ डॉलर हो गई है।
2021 में शुरू हुई थी कंपनी
2021 में शुरू हुई कंपनी River, भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में मौजूद कई स्टार्टअप्स में से एक है। यह Ather Energy और Ola Electric जैसी नई कंपनियों के साथ-साथ Bajaj Auto और TVS Motor जैसे पुराने मैन्युफैक्चरर्स से भी मुकाबला कर रही है। भारत में EV अपनाने के मामले में यह मार्केट अब तक सबसे बड़ा जरिया रहा है।
हर महीने 6 हजार गाड़ियों की बिक्री
अपने ज्यादातर कॉम्पिटिटर्स के उलट, River ने अपना बिजनेस सिर्फ एक इलेक्ट्रिक मोपेड मॉडल, ‘Indie’ के आस-पास बनाया है, जिसे उसने 2023 में लॉन्च किया था। स्टार्टअप का कहना है कि वह अब भारत भर में 75 से ज्यादा स्टोर के जरिए हर महीने लगभग 6,000 गाड़ियां बेचती है और अब तक 50,000 से ज्यादा यूनिट बेच चुकी है।
मैन्युफैक्चरिंग का दायरा फैला
मणि ने कहा कि River ने कई कंज्यूमर सेगमेंट में मुकाबला करने के बजाय Indie को एक यूटिलिटी-फोकस्ड गाड़ी के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पिछले साल स्टार्टअप की सबसे बड़ी कामयाबी मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर करने का तरीका सीखना रही है। उन्होंने कहा, ”एक समय ऐसा था जब हम दिन में 20 गाड़ियां बनाते थे। आज हम एक दिन में 300 गाड़ियां बनाते हैं, और इस स्तर तक पहुंचना आसान नहीं रहा है। किसी भी कंपनी के लिए यह सीखने का सबसे मुश्किल दौर रहा है।”

