कहा- जांच में सहयोग करना होगा और बिना अदालत की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे
Pawan Khera Bail, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है। इस फैसले से पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से फिलहाल सुरक्षा मिल गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पवन खेड़ा की ओर से गुरुवार को अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखी थीं। पवन खेड़ा की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है।
कोर्ट के फैसले के बाद जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पर कहा, 60 पुलिसवालों को खेड़ा के घर पर भेज दिया। भारी संख्या में पुलिस भेजने का कारण सिर्फ डराना और उत्पीड़न करना था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री को तीन पन्नों में कोट किया है।
ऐसी कई बातें हैं जो न न्यायालय कोट कर सकता है और न हम यहां बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में असम के मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ये शोभा देता है? हम चाहते हैं कि असम के मुख्यमंत्री इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार कर खेद व्यक्त करें।
यह है मामला
मामला असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास 3 विदेशी पासपोर्ट और अमेरिका में 50 हजार करोड़ की कंपनी होने के आरोप से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कांफ्रेंस करके ये आरोप लगाए थे। इसके बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन के खिलाफ गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई थी इसके बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस ने खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पर रेड की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रभावित लगते हैं। लेकिन पवन खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा और वे बिना अदालत की अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकते।
मुझे किसी से भी लोकतंत्र पर सबक सीखने की जरूरत नहीं
कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस के बाद असम सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि- मुझे किसी से भी लोकतंत्र पर सबक सीखने की जरूरत नहीं है। इस केस में असली मुद्दा यह है कि एक महिला की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उछाला गया, जिसका राजनीति से कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अदालतें जल्द ही या बाद में इस पर संज्ञान लेंगी और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वालों को सजा मिलेगी।
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