गुरुवार को 120 डॉलर प्रति बैरल बिका कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते बढ़ रहे दाम
Crude Oil Price (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजरायल ने जैसे ही 28 फरवरी को मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए तो ईरान ने भी पलटवार करते हुए न केवल खाड़ी देशों पर अमेरिकी सेना के बेस पर हमला किया। बल्कि ईरान ने विश्व सप्लाई के लिए सबसे प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज को भी बंद कर दिया। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के चलते विश्व में कच्चे तेल की सप्लाई काफी ज्यादा प्रभावित हुई है। इसके साथ ही खाड़ी देशों पर हुए ईरान के हमलों से जहां कच्चे तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ है वहीं इसकी कीमतों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
2022 के बाद इतनी बढ़ी कीमतें
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड आॅयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में गतिरोध और ईरानी बंदरगाहों व निर्यात पर अमेरिका की लंबी नाकेबंदी की चिंताओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से यह भारी उछाल आया है। इस ऊर्जा संकट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक प्रमुख कारण है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश की गई थी; ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि जब तक कोई व्यापक परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक रोक जारी रहेगी। नाकेबंदी के संभावित प्रभावों को कम करने के लिए ट्रंप ने तेल कंपनियों के साथ बैठक भी की है।
ट्रंप ने एक बार फिर दी ईरान को चेतावनी
इसके साथ ही, ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे जल्द समझदारी दिखानी चाहिए। इस पोस्ट में एक एआई-जनरेटेड तस्वीर भी साझा की गई, जिसमें ट्रंप को बंदूक पकड़े हुए दिखाया गया है और पीछे विस्फोट हो रहे हैं, साथ ही नो मोर मिस्टर नाइस गाय का संदेश लिखा गया है। विश्लेषकों ने इस स्थिति को दुनिया के अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा व्यवधान के रूप में वर्णित किया है, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है।
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