गुरुग्राम. हरियाणा के गुरुग्राम में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशविंदर पॉल सिंह की अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. उन पर एक मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के प्लॉट की धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है.
सेक्टर-14 थाना में 5 सितंबर 2023 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. इसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, रोशनी बिश्नोई पर मृतक सुनील कुमार के नाम पर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का आरोप है. इस फर्जी लाइसेंस का उपयोग एक्सिस बैंक में सुनील कुमार के नाम पर एक फर्जी बैंक खाता खोलने के लिए किया गया था. इस खाते से 2,38,43,750 रुपये रोशनी बिश्नोई के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए.
रोशनी बिश्नोई ने यह फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस अपनी ईमेल आईडी से सह-आरोपी विकास बिश्नोई को भी भेजा था. अन्य सह-आरोपियों के बयानों में भी उनकी संलिप्तता सामने आई है. उनके खिलाफ एक और एफआईआर संख्या 318 भी दर्ज है, जिसमें वह वांछित हैं. अदालत ने सह-आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज होने और रोशनी बिश्नोई की संलिप्तता के प्रथम दृष्टया सबूतों को देखते हुए यह फैसला सुनाया.
धोखाधड़ी का मामला
शिकायतकर्ता धर्मबीर ने आरोप लगाया था कि उनके पिता सुनील कुमार को गुरुग्राम के सेक्टर 23-23ए में एक कनाल का प्लॉट आवंटित किया गया था. सुनील कुमार का निधन 15.07.2010 को हो गया था. आरोप है कि कृष्ण लाल बिश्नोई और उनके बेटे विकास बिश्नोई ने सुनील कुमार के नाम पर फर्जी बिक्री विलेख तैयार कर प्लॉट को धोखाधड़ी से हस्तांतरित करने की साजिश रची. किर्ता राम नामक व्यक्ति ने सुनील कुमार का प्रतिरूपण किया. प्लॉट का बाजार मूल्य करीब चार करोड़ रुपये था, लेकिन इसे 2,42,74,500 रुपये में बेचा गया. शिकायतकर्ता ने दस करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और कई अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है.
बचाव पक्ष की दलीलें और अभियोजन का खंडन
रोशनी बिश्नोई के वकील ने दलील दी कि वह न तो प्रतिरूपणकर्ता थीं और न ही संपत्ति लेनदेन में कोई गवाह या लाभार्थी थीं. उन्होंने कहा कि उनके बैंक खाते में धन का हस्तांतरण मात्र अपराध नहीं है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर में उनका नाम नहीं था और शिकायत दर्ज करने में काफी देरी हुई. अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का खंडन किया. उन्होंने बताया कि रोशनी बिश्नोई ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस तैयार किया और उसे ईमेल के माध्यम से भेजा. उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है ताकि अन्य ईमेल और लेनदेन का पता लगाया जा सके.

