उसी दौरान आयात रहा सीमित, निर्यात में 8.5 प्रतिशत की तेजी
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पिछले कुछ समय से बदलती वैश्विक परिस्थितियों और टैरिफ के दबाव में न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है बल्कि देश का निर्यात भी सामान्य के मुकाबले ज्यादा बढ़ा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बोनस से कम नहीं है। यदि हम सरकारी आंकड़ों की बात करें तो जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के निर्यात में 8.5% की वृद्धि हुई।
यह बड़ी उपलब्धि इसलिए भी है क्योंकि इस दौरान भारत का निर्यात प्रदर्शन मजबूत रहा है, जबकि आयात वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही। इस अवधि में आयात की वृद्धि करीब 4.5 प्रतिशत दर्ज की गई, जो व्यापार संतुलन के दृष्टिकोण से सकारात्मक संकेत है। यह टिप्पणी ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ के छठे संस्करण के जारी होने के मौके पर की गई, जिसमें भारत के व्यापार रुझानों और अवसरों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी आया सामने
रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में लगभग 8.5 प्रतिशत की समान वृद्धि रही। भारत के शीर्ष निर्यात क्षेत्रों ने कुल शिपमेंट का करीब 89 प्रतिशत हिस्सा लिया। इनमें सालाना आधार पर 7.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें उत्तर अमेरिका और यूरोपीय संघ प्रमुख रहे। वहीं आयात वृद्धि मुख्य रूप से पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका से बढ़ती मांग के कारण रही।
वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत
वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का आकार करीब 4.6 ट्रिलियन डॉलर है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल लगभग 1 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की बड़ी संभावना मौजूद है। उन्होंने केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मेन्युफैक्चरिंग के लिए 40,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि अब असेंबली के साथ-साथ कंपोनेंट निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के निर्यात बास्केट में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है और मोबाइल फोन निर्यात करीब 50 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है।
हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार घाटा समय के साथ बढ़कर 2016 के 35 अरब डॉलर से लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता है। भारत ने लगभग 8-9 एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी आई है और विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, को बेहतर बाजार पहुंच मिली है।
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