कहा, भारत ने अमेरिका से मिली एक माह की छूट का पूरा फायदा उठाया
Crude Oil Import From Russia (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजरायल ने जब 28 फरवरी को मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए तो ईरान ने भी न केवल इन हमलों का जवाब दिया बल्कि विश्व व्यापार के लिए सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद करने का ऐलान कर दिया। ईरान के इस ऐलान के साथ ही पूरी दुनिया में जरूरी सामान की सप्लाई बुरी तरह से बाधित हो गई।
इनमें सबसे ज्यादा तेल और गैस आपूर्ति थी। अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर खुद को घिरते हुए पाकर रूस और ईरान से तेल आयात की सभी देशों को अनुमति दे दी। हालांकि यह अनुमति मात्र एक माह के लिए थी। भारत भी उन देशों में शामिल था जिन्हें रूस से कच्चा तेल आयात करने की अनुमति मिली थी। भारत ने बिना समय गवाए रूस से कच्चा तेल आयात करना शुरू कर दिया।
एक माह में ही रिकॉर्ड तेल खरीदा
भारत ने मार्च 2026 में रूस से कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी की है। अमेरिका से मिली एक महीने की विशेष छूट का फायदा उठाते हुए, भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से रूसी तेल आयात शुरू कर दिया है, जिससे भारत एक बार फिर वैश्विक बाजार में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। रूस से यूरोप स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च आॅन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात मूल्य तीन गुना से अधिक बढ़कर 5.3 अरब यूरो हो गया।
मात्रा के लिहाज से भी इस आयात में दोगुना उछाल देखा गया है। कुल मिलाकर, भारत ने इस महीने 5.8 अरब यूरो के रूसी जीवाश्म ईंधन का आयात किया, जिसमें 91 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जबकि शेष हिस्से में 337 मिलियन यूरो का कोयला और 178.5 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 4 प्रतिशत की कमी आई, इसके बावजूद रूसी कच्चे तेल के आयात में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। इसके मुकाबले फरवरी में भारत 1.8 अरब यूरो के रूसी आयात के साथ तीसरे स्थान पर था।
सरकारी खरीद में 148 प्रतिशत की वृद्धि
इस जबरदस्त उछाल का मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर दी गई एक महीने की प्रतिबंधों से छूट थी। वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए समुद्र में पहले से मौजूद और पूर्व-मंजूर जहाजों पर यह छूट दी गई थी। इस छूट के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूसी तेल की खरीदारी रोक दी थी, ने फिर से आयात शुरू कर दिया। सीआरईए के अनुसार, इन सरकारी रिफाइनरियों के आयात में महीने-दर-महीने आधार पर 148 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जो कि मार्च 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है।

