पांच मई के बाद यह इसका सबसे उच्चतम स्तर, इस कारण आई दाम में तेजी
Crude Oil Price (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बयान दे रहे हैं उससे लगता है कि दोबारा इन दोनों में युद्ध शुरू हो सकता है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति और इसराइल के प्रधानमंत्री ने रविवार रात फोन पर लंबी बात की। जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों मिलकर एक बार फिर से ईरान पर बड़े हमले कर सकते हैं।
इसी बीच ट्रंप एक बार फिर से ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब फैसले लेने का वक्त खत्म हो रहा है। ट्रंप की इस चेतावनी और ईरान पर दोबारा हमला करने के कयासों के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से उछाल देखने को मिला।
1.32 प्रतिशत की लगाई छलांग
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। जब भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इस तरह तेजी से भागती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों के जरिए आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ता है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.32 प्रतिशत (करीब $1.44) की जोरदार छलांग के साथ 110.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह 5 मई के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (हळक) क्रूड भी पीछे नहीं है। यह 1.75 प्रतिशत ($1.84) उछलकर 107.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो 4 मई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
खाड़ी देशों में सप्लाई का बढ़ता संकट
कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि की एक बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई चेन का बुरी तरह प्रभावित होना है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही कम हो गई है, जिससे फारस की खाड़ी के उत्पादकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मॉर्गन स्टेनली जैसी प्रमुख वित्तीय संस्था ने भी चेतावनी दी है कि बाजार इस वक्त समय के खिलाफ एक दौड़ में है।
अगर जून महीने तक यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता बंद रहता है, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट को खत्म करने के फैसले ने भी आपूर्ति पर भारी दबाव डाला है, जबकि भारत ने इस छूट को आगे बढ़ाने की गुजारिश की थी।
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