Patanjali stock crash : घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को बाबा रामदेव के स्वामित्व वाली कंपनी पतंजलि फूड्स के शेयर में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी के शेयर में लगभग 20% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लगतार तीसरे सत्र में कंपनी के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। मार्केट में ढेर होते कंपनी के शेयरों से निवेशक सांसत में हैं। हालत यह है कि कंपनी का शेयर लगभग 15% की गिरावट के साथ 52 हफ्ते के निचले स्तर ₹347.59 पर पहुंच गया है।
बिकवाली से टूटे शेयर
बिकवाली की आंधी की वजह से पतंजलि फुड्स के शेयरों में गिरावट आई है। 15 जुलाई को लगभग 2।6 करोड़ शेयरों की बिकवाली हुई, जो कंपनी के कुल शेयरों का 2.43% है। यह आंकड़ा स्टॉक के औसत ट्रेडिंग वैल्यू का छह गुना से ज्यादा है।
सालभर में 35% टूटे
पतंजलि फुड्स के शेयर पिछले एक साल से दबाव में हैं। बीते एक साल के भीतर इसमें लगभग 35% तक की गिरावट हो चुकी है। आज की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। एकदिनी बड़ी गिरावट से किसी शेयर को कोई खास फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि वे कुछ ही दिनों में अपने मूल प्राइस पर वापस लौट जाते हैं, लेकिन लगातार हो रही गिरावट चिंता का विषय है।
लोअर सर्किट पर करना पड़ा लॉक
शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर 30 मिनट के अंदर लगभग 7% टूट गया। वहीं, ठीक 10:22 बजे शेयर 10% गिरकर लोअर सर्किट पर लॉक हो गया। शेयर ने 407.55 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 407।50 रुपये पर लगभग सपाट शुरुआत की थी, लेकिन बाजार खुलने के कुछ ही मिनट बाद बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और सुबह 12:47 बजे तक शेयर 17% गिर गया था।
किसकी कितनी हिस्सेदारी
पनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 68.25%, डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) की हिस्सेदारी 11।05% और FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) की हिस्सेदारी 8.53% है।
किन कारणों से गिरे शेयर
- बुधवार को जून 2024 के बाद कंपनी के शेयरों में सबसे बड़ी 7% की इंट्राडे गिरावट देखी गई, जिसके बाद शेयर दबाव में आ गए और बिकवाली की आंधी सी चल पड़ी।
- 25 लाख के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 67 लाख शेयरों के कारोबार ने भी बिकवाली को हवा दी।
- कंपनी का FMCG इंडेक्स पिछले कई महीनों से अपने सेक्टर से पीछे चल रहा है।
- पिछली चार तिमाहियों में EBITDA ग्रोथ का ट्रेंड निवेशकों को ज्यादा भरोसा नहीं दिला पाया।
फिलहाल डर की बात नहीं
कंपनी में बड़े निवेशक अभी बरकरार हैं। GQG Partners के पास 11.42% हिस्सेदारी है। LIC के पास 9.13% हिस्सेदारी है। ऐसे में निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं लग रही है। हालांकि, अभी भी शेयरों पर बिकवाली का दबाव साफ नजर आ रहा है।

