Bulldozer Action at Abhishek Banerjee Office: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला इलाके में शनिवार को उस समय हलचल मच गई, जब प्रशासन ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के एक अवैध कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। ध्वस्तीकरण के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर तैनात किया गया। अधिकारियों के अनुसार इस ऑफिस निर्माण निर्धारित नियमों और स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया था। इसी आधार पर तय प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की गई।
क्या है पूरा मामला?
प्रशासन का कहना है कि जिस भवन पर बुलडोजर चलाया गया, वह बिना आवश्यक अनुमति और नियमों के विपरीत बनाया गया था। अधिकारियों ने पहले भवन से जुड़े दस्तावेजों, नक्शे और स्वीकृतियों की जांच की। जांच के बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है और इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।
पहले भी दिए गए थे नोटिस
यह पहला मौका नहीं है जब अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियां प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में आई हों। इससे पहले कोलकाता नगर निगम (KMC) ने उनके आवास और अन्य संपत्तियों को लेकर अवैध निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किए थे। नोटिस में भवन निर्माण की मंजूरी, नक्शे और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय अभिषेक बनर्जी की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया था। इसी मामले में पहले उनके आवास पर पुलिस भी पहुंची थी और बाद में जांच एजेंसियों ने दस्तावेजों की जांच की थी।
राज्य की राजनीति गर्माई
इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह केवल भवन निर्माण नियमों के पालन से जुड़ी नियमित कार्रवाई है। अभी तक अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस ध्वस्तीकरण को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

