पहली बार अपने पारंपरिक पुष्प मुकुट ‘ताहिया’ के बिना भक्तों को दर्शन देते नजर भगवान जगन्नाथ
Jagannath Rath Yatra, (द भारत ख़बर), पुरी: पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का पहला चरण शुक्रवार को पूरा हो गया। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार दोपहर श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। गुरुवार को शुरू हुई रथ यात्रा के दौरान तीनों रथ निर्धारित समय तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके थे। इसके बाद परंपरा के अनुसार सूर्यास्त होने पर रथ खींचने की प्रक्रिया रोक दी गई थी और शुक्रवार सुबह इसे फिर से शुरू किया गया।
बारिश और उमस के बीच 9 लाख श्रद्धालु फिर से रथ खींचने के लिए ग्रैंड रोड पर जुटे। आज भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार दोपहर श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अब तीनों देवता अगले 7 दिन अपनी मौसी के घर रहेंगे। इसके साथ ही रथयात्रा पूरी हुई।
कल श्री गुंडिचा मंदिर में करेंगे प्रवेश
परंपरा के अनुसार, मूर्तियां रात भर अपने रथों पर ही रहेंगी और शनिवार शाम को उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को इन तीनों देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।
एक घंटे से अधिक देर से पूरा हुआ पाहंडी अनुष्ठान
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि सभी अनुष्ठान समय पर हुए, लेकिन भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से पाहंडी अनुष्ठान एक घंटे से अधिक देर से पूरा हुआ।
उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ ग्रैंड रोड पर करीब 700 मीटर चलकर मार्केट चौक पर रुका। देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ लगभग 400 मीटर चलकर मरीचिकोट चौक तक पहुंचा। वहीं भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ कुछ ही दूरी तय कर मुख्य मंदिर के सिंहद्वार के पास रुक गया था।

