फरीदाबाद. कभी जिस रजनीगंधा की खुशबू से फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसानों के घरों में खुशहाली आती थी, आज वही फूल उनकी चिंता की वजह बन गए हैं. इस गांव को फूलों का हब कहा जाता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में किसान रजनीगंधा की खेती करते हैं. पहले इसी खेती से किसानों को हर महीने अच्छा मुनाफा हो जाता था, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदल गए हैं. मंडियों में फूलों के दाम इतने गिर गए हैं कि किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. ऐसे में किसान अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सर्दियों में शादी और त्योहारों का सीजन शुरू होगा तो शायद रेट सुधर जाएं.
‘मैं 5 साल से उगा रहा’
किसान सुरेश कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि मैं रजनीगंधा की खेती पट्टे पर जमीन लेकर करता हूं. पट्टे का रेट हर खेत के हिसाब से अलग-अलग होता है. किसी का 30 हजार रुपये प्रति एकड़ है, किसी का 40 हजार रुपये और किसी का 50 हजार रुपये प्रति एकड़. यह सब मिट्टी और खेत की हालत पर निर्भर करता है. मैं करीब 5 साल से रजनीगंधा की खेती कर रहा हूं और इसी से परिवार का गुजारा चलता है.
खरीदने वाले कम
किसान सुरेश कुमार बताते हैं कि इस समय सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि रजनीगंधा की बुवाई ज्यादा हुई है, लेकिन मार्केट में मांग बहुत कम है. अभी न शादी का सीजन है, न कोई बड़ा त्योहार और न ही ज्यादा पार्टियां हो रही हैं. इसलिए मंडियों में फूलों की खरीद कम हो रही है. माल ज्यादा पहुंच रहा है, लेकिन खरीदने वाले कम हैं. सर्दियों में फूल कम निकलते हैं और उसी समय शादी-ब्याह भी ज्यादा होते हैं इसलिए उस समय अच्छे रेट मिल जाते हैं. हमारे गांव फतेहपुर बिल्लौच में करीब 25 प्रतिशत किसान रजनीगंधा की खेती करते हैं.
कितने दिन की खेती
किसान सुरेश कुमार के मुताबिक, रजनीगंधा का कोई तय रेट नहीं होता. एक बंडल में 48 पीस होते हैं. पहले यही बंडल सीजन में 500 रुपये तक बिक जाता था, लेकिन आज 10 से 20 रुपये में भी बिक रहा है. इतने कम दाम मिलने से खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है. इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और सभी परेशान हैं. सुरेश बताते हैं कि रजनीगंधा की फसल मिट्टी और पानी पर निर्भर करती है. अगर मिट्टी और पानी सही मिल जाए तो एक बार लगाने के बाद फसल करीब दो साल तक चल जाती है. अगर मिट्टी साथ नहीं दे तो एक साल निकालना भी मुश्किल हो जाता है. गर्मियों में 8 से 10 दिन के अंदर सिंचाई करनी पड़ती है.
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