नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई हालिया टेस्ट सीरीज के बीच क्लब के बाहर हुए मारपीट की घटना के बाद काफी बवाल हुआ. मामला इतना बढ़ा कि टीम मैनेजमेंट ने कप्तान बेन स्टोक्स को ही प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया. सीरीज के आखिरी मैच में उन्होंने वापसी तो की लेकिन इसके बाद सबको चौंकाते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी. संन्यास लेने के बाद इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने घरेलू क्रिकेट में शानदार वापसी की है.
स्टोक्स ने वन-डे कप में डरहम की ओर से खेलते हुए नाबाद शतक जड़ा और अपनी टीम को डर्बीशायर के खिलाफ पांच विकेट से यादगार जीत दिलाई. यह मुकाबला स्टोक्स का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के ऐलान के बाद पहला प्रतिस्पर्धी मैच था. वह करीब 12 साल बाद डरहम के लिए लिस्ट-ए क्रिकेट खेलते नजर आए. 35 साल के स्टोक्स ने 108 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया.
Every boundary from Stokesy’s fourth Durham List A century. 😮💨#ForTheNorth pic.twitter.com/dyGiVVzpU7
— Durham Cricket (@DurhamCricket) July 21, 2026
स्टोक्स अपनी पूरी पारी के दौरान मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प्स) से परेशान रहे. अर्धशतक पूरा करने के बाद तो वह दर्द के कारण मैदान पर गिर भी पड़े, लेकिन उन्होंने रिटायर्ड हर्ट होने से इनकार कर दिया. लगातार संघर्ष करते हुए उन्होंने शतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहकर टीम को जीत दिलाई.

इससे पहले गेंदबाजी में स्टोक्स कुछ खास नहीं कर सके. उन्होंने अपने नौ ओवर में 56 रन देकर कोई विकेट नहीं लिया. डर्बीशायर ने निर्धारित ओवरों में 9 विकेट पर 256 रन बनाए. डर्बीशायर के लिए मार्टिन एंडरसन ने शानदार शतक लगाया, जबकि बेन ऐचिसन ने नई गेंद से डरहम के दो शुरुआती विकेट चटकाकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई. 257 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए डरहम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. इसके बाद स्टोक्स ने विल रोड्स (45 रन) के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी को संभाला. बाद में कॉलिन एकरमैन और ओली रॉबिन्सन ने भी उपयोगी योगदान दिया, जिससे स्टोक्स ने संयम के साथ पारी को आगे बढ़ाया और टीम को जीत दिला दी.
स्टोक्स ने हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट के दौरान अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था. उन्होंने ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट की नीलामी में भी हिस्सा नहीं लिया और पहले ही वन-डे कप में डरहम के लिए खेलने की प्रतिबद्धता जताई थी. उनका यह शतक इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बावजूद वह घरेलू क्रिकेट में अभी भी उसी जुनून और जुझारूपन के साथ खेल रहे हैं. दर्द से जूझते हुए खेली गई यह पारी क्रिकेट प्रशंसकों के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगी.

