Associated British Ports Deal: भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन करने वाली गौतम अडाणी की कंपनी अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) अब देश से बाहर अपना पांव पसारने की तैयारी कर रही है। अडाणी की कंपनी, ब्रिटेन में बंदरगाहों का संचालन करने वाली सबसे बड़ी कंपनी एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट (ABP) के लिए बोली लगाने पर विचार कर रही है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
सवाल का नहीं दिया जवाब
मनीकंट्रोल के सवालों का जवाब देते हुए APSEZ के एक प्रवक्ता ने कहा, ”कंपनी की नीतियों के तहत हम बाजार की अटकलों या अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते। हम उन मौकों पर लगातार विचार करते हैं, जो हमारी लंबे समय की रणनीति के अनुकूल होते हैं और सभी हितधारकों के लिए सतत वैल्यू का निर्माण करते हैं।”
ब्रिटिश कंपनी पर लगाएंगे दांव?
ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में 21 बंदरगाहों का संचालन करती है, जिनमें साउथैंप्टन और हंबर भी शामिल हैं। साथ ही, यह कंपनी ब्रिटेन के समुद्र से होने वाले एक चौथाई व्यापार को मैनेज करती है। यह कंपनी स्पैन कंटेनर, ऑटोमोबाइल, ड्राई एंड लिक्विड बल्क कारगो, क्रूज वेसेल और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट का संचालन करती है।
बड़ी कंपनियों की है हिस्सेदारी
कनाडा के पेंशन फंड CCP और ओंटारियो म्यूनिसिपल एंप्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम्स (OMERS) की ABP में लगभग 64% हिस्सेदारी है। OMERS ने मनी कंट्रोल के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। CPPIB और एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं आया।
शुरुआती चरण में प्रक्रिया
ब्लूमबर्ग ने अप्रैल में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि प्रस्तावित बिक्री में दुनियाभर के इ्ंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टर्स और बंदरगाहों के संचालकों ने दिलचस्पी दिखाई थी। इन कंपनियों में KKR, ब्लैकरॉक के स्वामित्व वाली कंपनी ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (GIP), ब्रुकफील्ड ऐसेट मैनेजमेंट और दुबई की डीपी वर्ल्ड शामिल थी। प्रक्रिया फिलहाल शुरुआती चरण में है और अभी तक औपचारिक तौर पर कोई बोली सबमिट नहीं की गई है।
सबसे बड़ा विदेशी सौदा
ABP का अधिग्रहण अडानी पोर्ट्स का सबसे बड़ा विदेशी सौदा होगा और इससे कंपनी को यूरोप की सबसे बड़ी व्यापारिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक में काम करने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिलेगा। हाल के वर्षों में APSEZ ने भारत के बाहर लगातार अपना विस्तार किया है। इसका सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण इजराइल का हाइफा बंदरगाह है, जिसे गैडोट ग्रुप के साथ मिलकर लगभग 1.18 अरब डॉलर में खरीदा गया था। इस वेंचर में अडानी पोर्ट्स की 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

