नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम इस समय बदालव के दौर से गुजर रही है. ऐसा टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर का कहना है. कमाल की बात यह है कि मिस्टर गंभीर के टीम के आने के कुछ सालों के भीतर ही एक एक करके सारे सीनियर जिनके अंदर काफी क्रिकेट बचा था, संन्यास लेकर टेस्ट से अलग हो गए. रविचंद्रन अश्विन, विराट कोहली और रोहित शर्मा ने खुद आगे भारतीय टीम के लिए खेलने रहने की इच्छा कई बात अलग अलग कार्यक्रम और लोगों से बात करते हुए जताई थी. गंभीर को इन सभी सीनियर को संन्यास लेने के लिए मजबूर करने का दोषी माना जाता है. इस बात को कई पूर्व क्रिकेटर बोर चुके हैं. कमाल की बात यह है कि सीनियर्स को पहले बाहर होने पर मजबूर किया फिर टीम को बदलाव के दौर से गुजर रहा बताया जा रहा है.
टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर का करियर कितना शानदार रहा ये उनके आंकड़े बताते है. जितने रन टेस्ट में बतौर ओपनर उन्होंने बनाए हैं उसे टीम इंडिया के ऑलराउंडर रवींद्र जेडजा अगले कुछ मैच में पीछे छोड़ देंगे. मिस्टर गंभीर ने पूरे टेस्ट करियर में सिर्फ 10 छ्क्के लगाए. शर्म की बात यह है कि श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन जिसने सिर्फ 1261 टेस्ट रन बनाए हैं उनके नाम भी 29 छक्के दर्ज हैं.

चलिए पूर्व क्रिकेटर के बयान से मिर्ची लगने के बाद उनपर व्यूज और लाइक्स पाने के लिए ऐसा करने का आरोप लगाने वाले कोच साहब का श्रीलंका का बल्लेबाजी रिकॉर्ड देख लेते हैं. श्रीमान गौतम गंभीर जी ने श्रीलंका की धरती पर 4 टेस्ट मैच खेला और इसमें उनके सिर्फ 312 रन निकले. मतलब चार मैच 8 पारी और हर पारी में औसतन 38 रन ही बना पाए.
श्रीलंका में खेली गई 8 पारियों पर नजर डालें तो 150 से 190 बॉल खेलने के बाद मुश्किल से तीन फिफ्टी नजर आती है. एक ओपनर जिसके पास हर मैच में बड़ा स्कोर करने का मौका होता है वो 8 टेस्ट पारी में एक शतक नहीं लगा पाया. टेस्ट करियर में 58 मैच 104 पारी में उनके नाम सिर्फ 9 शतक दर्ज है. इसमें एक दोहरा शतक लगाया है. जिस मैच में गंभीर ने फिफ्टी ठोकी थी उसमें उनसे साथी ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने दोहरा शतक जमाया था.

हम यहां नीचले क्रम के बैटर की बात नहीं कर रहे सिर्फ उस मैच के ओपनर की तुलना हो रही है. दूसरी पारी में जहां हमारे मौजूदा कोच ने 74 रन बनाए थे उसमें भी सहवाग ने फिफ्टी मारी थी. कुल मिलाकर गौतम गंभीर का टेस्ट औसत भले ही 41 का रहा हो लेकिन श्रीलंका में पारी के लिहाज से वो बेहद औसत बल्लेबाज रहे.

