नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के महान कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी के साथ कुछ ऐसा हुआ था कि उनको मैदान से बाहर जाने कह दिया गया. वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा ने साफ कह दिया था अगर ये खिलाड़ी खेलेगा तो मैं मैदान छोड़ दूंगा. साल 2006 में भारत के वेस्टइंडीज दौरे पर ये वाकया हुआ था. कमाल की बात यह हुई कि उस समय टीम की कप्तानी कर रहे राहुल द्रविड़ ने चतुराई भरा फैसला लेते हुए पारी घोषित करने का फैसला लिया. इससे बड़ा बवाल होने के बच गया.
साल 2006 में भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरा पर थी. चार मैचों की सीरीज के पहले ही मुकाबले में कुछ ऐसा हुआ जिसने माहौल गरम कर दिया.टीम इंडिया पहली पारी में महज 241 रन पर सिमट गई थी. इसके बाद मेजबान टीम ने 371 रन बनाकर बढ़त हासिल की. ऐसा लग रहा था वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ जीत दर्ज करके सीरीज में बढ़त बनाएगी. दूसरी पारी में जो हुआ उसने मैच का पासा पलट दिया. ओपनर वसीम जाफर ने अकेले एक छोर पर डटकर गेंदबाजों की खबर ली. उन्होंने 399 बॉल खेलकर 212 रन की मैराथन पारी खेल डाली. वीरेंद्र सहवाग ने 41 कप्तान राहुल द्रविड़ ने 62 रन बना. इन सबके बीच सबसे चर्चा में रही महेंद्र सिंह धोनी की अर्धशतकीय पारी.
मोहम्मद कैफ के साथ मिलाकर धोनी ने भारतीय टीम के स्कोर को 500 रन के पार पहुंचा दिया. उन्होंने 52 बॉल खेलने के बाद 69 रन बनाए थे. शानदार फॉर्म में चल रहे माही ने 151वें ओवर में लगातार तीन छक्के लगाए. ओवर की पांचवीं गेंद पर डैरेन गंगा ने बाउंड्री के पास धोनी का कैच पकड़ लिया. यह कैच सही था या नहीं इसका फैसला थर्ड अंपायर भी नहीं ले पाए. ऐसे में वेस्टइंडीज के कप्तान ब्रायन लारा खुद धोनी के पास जाकर उन्हें मैदान से बाहर जाने के लिए कहा.
वेस्टइंडीज के कप्तान अंपायर से इतने ज्यादा नाराज थे कि उनसे बात तक नहीं की. धोनी ने इस बारे में बताया था कि लारा ने अपने खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा होने की बात कही. उनका कहना था कि अगर वो कह रहे हैं कैच सही है तो उनको उसे सच माना जाना चाहिए. इस बीच बवाल होता देख टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे राहुल द्रविड़ ने तुरंत भारत के पारी को डिक्लियर करने का ऐलान कर दिया. ऐसे धोनी को मैदान छोड़ना पड़ा और विवाद वहीं खत्म हुआ.

