Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी में त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने को लेकर दिए गए निर्देशों को लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQAM) को फटकार लगाई है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने साफ कहा कि निर्देशों का पालन नहीं होने से उसके आदेश सिर्फ सैद्धांतिक बनकर रह गए हैं। बार-बार नियमों का उल्लंघन होने से आदेशों का ‘मजाक’ बन रहा है।
पीठ ने अधिकारियों से किए सवाल
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ”आपने वास्तव में क्या किया? जब तक आप हमें यह नहीं बता सकते कि आपने क्या किया है, तब तक आदेश पारित करने का क्या मतलब है? फिर तो यह एक मजाक बन जाता है।” पीठ ने ने कहा कि निर्देशों के पालन और उनके असर से जुड़े ठोस आंकड़े मौजूद नहीं हैं।
इलाकों का मांगा आंकड़ा
कोर्ट ने पूछा कि क्या पिछले साल उसके आदेशों के बाद गठित निगरानी टीमों ने वास्तव में उन इलाकों का दौरा किया था, जिनकी पहचान की गई थी। उसने यह भी पूछा कि टीमें कब वहां गईं और उन्होंने कौन-से आंकड़े जुटाए। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या उन इलाकों का कोई आकलन किया गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेज बढ़ोतरी हुई थी। साथ ही, उन इलाकों का भी आकलन किया गया या नहीं, जहां AQI में ऐसी बढ़ोतरी नहीं हुई थी।
उच्च स्तर पर सोचने की हिदायत
कोर्ट ने कहा, ”अगले साल, जब हम यहां नहीं होंगे, तब आप किसी दूसरी पीठ के सामने इसी तरह की दलील देंगे।” उसने अधिकारियों से कहा कि वे अब उच्च स्तर पर सोचें। पीठ ने कहा कि यह मामला अधिकारियों के लिए किसी पक्ष और विपक्ष के बीच का विवाद नहीं है। यह हर जीवित प्राणी से जुड़ा है।
‘हम जनता की भावना समझते हैं’
कोर्ट ने कहा, हम त्योहारों को लेकर जनता की भावनाओं को भी समझते हैं। हम धर्म की बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन हम तार्किक बात कर रहे हैं कि हम वास्तव में किसी को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहार कैसे मनाएंगे?
संतुलन बनाने की कोशिश
कोर्ट ने कहा, ”हम पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं। हम संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” पीठ ने अधिकारियों से उन दो दिनों पर खास ध्यान देने को कहा, जब पटाखे जलाने की अनुमति होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी जमीन पर स्थिति की वास्तविक निगरानी करें।

