काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह कहती हैं, ‘गीला कचरा प्रबंधन व्यवसाय के संचालन का सबसे प्रचलित तरीका लोक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत नगरपालिका के साथ समझौता है. इसके अलावा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए प्लांट के मालिक और नगरपालिका के बीच एक कंसेशनेयर एग्रीमेंट भी होता है, ताकि प्लांट के लिए तय मात्रा और गुणवत्ता के साथ जरूरी सामग्री (फीडस्टॉक) की आपूर्ति हो सके.

कचरे के प्लांट और उससे होने वाली इनकम को लेकर सभी सवालों के जवाब दे रही हैं सीईईडब्ल्यू की एक्सपर्ट प्रियंका सिंह.
हालांकि आप अपनी पूंजी और तकनीकी क्षमता के आधार पर अलग-अलग तरह के कॉन्ट्रेक्ट कर सकते हैं, जैसे साधारण सेवा अनुबंध (कचरे का एकत्रण और परिवहन), प्रबंधन अनुबंध या बड़ी प्रसंस्करण सुविधाओं के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) और डिजाइन-बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBOOT) जैसे बड़े मॉडल.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी साझेदारियों की शर्तें एक नगरपालिका से दूसरी नगरपालिका में अलग-अलग हो सकती हैं. ऐसे में जब भी आप काम शुरू करें तो उससे पहले अपनी नगर पालिका से उसकी शर्तें जरूर जान लें.
क्या जमीन भी देती है नगर-पालिका?
कुछ मामलों में नगरपालिका वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराती है, जबकि अन्य मामलों में प्लांट लगाने वाले को ही भूमि की व्यवस्था करनी पड़ती है. कुछ नगरपालिकाएं कचरा उत्पादकों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूलती हैं और वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट चलाने वालों को उपचारित किए गए कचरे की मात्रा के आधार पर भुगतान करती हैं. अगर कहीं पर वेस्ट प्रोसेसिंग करने वाले निजी पक्ष के पास कचरे को जमा करने और उसे लाने-ले जाने की जिम्मेदारी है तो उसे उपयोगकर्ता शुल्क जमा करने की जिम्मेदारी मिल जाती है.
भले ही छोटे पैमाने पर हो, लेकिन जैविक कचरा प्रबंधन सुविधा, विशेष तौर पर बायोगैस प्लांट, शुरू करने के लिए पूंजी निवेश की जरूरत होती है. व्यावहारिक रूप से ऐसी सुविधाएं आमतौर पर अकेले व्यक्तियों की जगह पर निजी पंजीकृत कंपनियों द्वारा संचालित की जाती हैं. हालांकि, अगर आप एक तकनीकी रूप से योग्य उद्यमी हैं और प्रोप्रराइटरशिप फर्म का नेतृत्व करने और नगरपालिका के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं, तो प्लांट लगाने के लिए डायरेक्ट और इनडायरेक्ट मदद करने वाली योजनाएं और सब्सिडी मौजूद हैं.
यहां से ले सकते हैं प्लांट की जानकारी और ट्रेनिंग
भारत सरकार ने बायोगैस तकनीक में लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए आठ बायोगैस विकास और प्रशिक्षण केंद्र (BDTCs) बनाए हैं, जहां उद्यमिता-शिक्षा कार्यक्रम के तहत लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है. इनसे निकले लोग कई जगहों पर स्टार्टअप भी लगा रहे हैं.
प्लांट लगाने पर क्या आती हैं चुनौतियां?
देश में जैविक कचरा प्रबंधन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक सहायक वातावरण मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं.
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सवाल: 4 सरकारी योजनाओं में इस सेक्टर के लिए क्या कोई फंडिंग उपलब्ध है? क्या अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग सब्सिडी है? कितनी सब्सिडी मिलती है?

