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Delhi Metro Expansion Plan: दिल्ली-NCR में मेट्रो रेल नेटवर्क का लगातार विस्तार हो रहा है. नोएडा और गुरुग्राम में खासतौर पर मेट्रो नेटवर्क को एक्सपेंड किया जा रहा है. दिल्ली के साथ ही नोएडा और गुरुग्राम में मेट्रो की नई लाइन बिछाने की योजना पर लगातार काम चल रहा है, ताकि उन इलाकों को भी मेट्रो के दायरे में लाया जा सके, जो अभी तक इससे दूर हैं. अब गुरुग्राम के हजारों-लाखों लोगों को बड़ी खुशखबरी मिलने जा रही है. इन लोगों का धरती के पुष्पक विमान मेट्रो की सवारी करने का सपना जल्द ही साकार होने वाला है.
Delhi Metro Expansion Plan: गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाली 28.5 किलोमीटर लंबी नई मेट्रो परियोजना शहर के यात्रा तंत्र में बड़ा बदलाव लाने जा रही है. यह रिंग कॉरिडोर न केवल साइबर सिटी, उद्योग विहार और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा, बल्कि दशकों से मेट्रो नेटवर्क से वंचित रहे ओल्ड गुरुग्राम और द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र को भी पहली बार सीधे मेट्रो सुविधा से जोड़ेगा. इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों के लिए तेज, निर्बाध और बहु-माध्यमीय परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) द्वारा विकसित किया जा रहा यह रिंग कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन के मिलेनियम सिटी सेंटर स्टेशन से शुरू होगा. इसके बाद यह सेक्टर-45, साइबर पार्क, सुभाष चौक, पालम विहार, उद्योग विहार फेज-1 और साइबर सिटी जैसे महत्वपूर्ण इलाकों से गुजरते हुए द्वारका एक्सप्रेसवे स्पर पर स्थित सेक्टर-101 तक पहुंचेगा. इस पूरे मार्ग पर कुल 27 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे शहर के प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच आवागमन कहीं अधिक आसान हो जाएगा.
हाल ही में परियोजना के पूरे एलाइनमेंट का निरीक्षण करने के बाद GMRL के प्रबंध निदेशक चंदर शेखर खरे ने बताया कि इस परियोजना में दो प्रमुख इंजीनियरिंग समाधान अपनाए जा रहे हैं. पहला, ऐसे उच्च क्षमता वाले मल्टी-मॉडल इंटरचेंज हब विकसित किए जाएंगे, जहां यात्री बिना स्टेशन से बाहर निकले एक मेट्रो लाइन से दूसरी लाइन में आसानी से स्थानांतरित हो सकेंगे. दूसरा, ओल्ड गुरुग्राम की संकरी सड़कों वाले हिस्सों में डबल-डेकर एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक तैयार किए जाएंगे, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और यातायात भी बाधित नहीं होगा.
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परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण इंटरचेंज स्टेशन साइबर सिटी और मिलेनियम सिटी सेंटर होंगे. साइबर सिटी स्टेशन को आधुनिक टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां डबल वेस्टिब्यूल की सुविधा होगी. इससे यात्री नई गुरुग्राम मेट्रो लाइन, मौजूदा रैपिड मेट्रो और भविष्य में बनने वाले दिल्ली-अलवर रैपिड रेल कॉरिडोर (RRTS) के बीच एक ही पेड कॉनकोर्स के भीतर आसानी से ट्रेन बदल सकेंगे. इसी तरह मिलेनियम सिटी सेंटर स्टेशन पर नई लाइन को दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन से प्लेटफॉर्म-टू-प्लेटफॉर्म इंटरचेंज के माध्यम से जोड़ा जाएगा. इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यात्रियों को ट्रेन बदलने के लिए स्टेशन से बाहर निकलने, दोबारा सुरक्षा जांच कराने या नया प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इससे यात्रा का समय कम होगा और भीड़भाड़ भी घटेगी.
इसके अलावा सुभाष चौक पर प्रस्तावित भोंडसी मेट्रो लाइन, हीरो होंडा चौक पर दिल्ली-एसएनबी आरआरटीएस, सेक्टर-5 पर गुरुग्राम रेलवे स्टेशन और सेक्टर-10 पर प्रस्तावित मेगा बस टर्मिनल के साथ भी एकीकृत कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी. इससे शहर में मेट्रो, रेलवे, बस और रैपिड रेल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा. परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग पहल ओल्ड गुरुग्राम के सेक्टर-7 से साइबर सिटी तक के हिस्से में होगी. यहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र मौजूद हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए GMRL और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) डबल-डेकर स्टेशन डिजाइन पर काम कर रहे हैं. बजघेरा रोड और सेक्टर-21 के आसपास मेट्रो ट्रैक को मौजूदा फ्लाईओवर के ऊपर उसी मीडियन में स्थापित करने की योजना है. इससे बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से बचा जा सकेगा और निर्माण के दौरान यातायात पर भी कम प्रभाव पड़ेगा.
इस नई मेट्रो लाइन का सबसे बड़ा लाभ ओल्ड गुरुग्राम को मिलने की उम्मीद है. अब तक सेक्टर-3, 4, 5, 7, 9, बसई और पालम विहार जैसे घनी आबादी वाले इलाके मेट्रो नेटवर्क से पूरी तरह बाहर थे. इन क्षेत्रों के लाखों लोगों को रोजाना सड़क मार्ग, ऑटो-रिक्शा या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था. नई रिंग लाइन इन इलाकों को सीधे साइबर सिटी और उद्योग विहार जैसे प्रमुख रोजगार केंद्रों से जोड़ देगी, जिससे यात्रा का समय घटेगा और सड़कों पर दबाव भी कम होगा. द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र, जहां हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में हाईराइज आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं, उसे भी इस परियोजना से महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. बसई गांव से सेक्टर-101 तक दो स्टेशन वाले स्पर कॉरिडोर के जरिए इस क्षेत्र को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.
निर्माण कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. परियोजना का पहला 15.2 किलोमीटर लंबा पैकेज, जिसकी लागत लगभग 1,503 करोड़ रुपये है, दिलीप बिल्डकॉन-रंजीत बिल्डकॉन संयुक्त उपक्रम को दिया गया है. इस पैकेज को 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. एलिवेटेड वायाडक्ट के लिए प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट तैयार करने वाले कास्टिंग यार्ड चालू हो चुके हैं, जबकि जीएमडीए कार्यालय से हीरो होंडा चौक के बीच पाइलिंग और पियर निर्माण का कार्य जारी है.
ओल्ड गुरुग्राम वाले हिस्से, जिसे परियोजना में प्रायोरिटी-2 के रूप में चिह्नित किया गया है, की तैयारी भी शुरू हो चुकी है और इसमें विश्व बैंक की वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है. केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठकों में तय समयसीमा के अनुसार मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 कॉरिडोर को अगस्त 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अधिकारियों का प्रयास है कि पहले पैकेज के प्रमुख सिविल कार्य 2027 के अंत तक पूरे कर लिए जाएं ताकि समय रहते ट्रायल रन शुरू किए जा सकें. अधिकारियों के अनुसार 21 जुलाई तक इस 28.5 किलोमीटर लंबी परियोजना में लगभग 11 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की जा चुकी है. परियोजना पूरी होने के बाद गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है और शहर के पुराने तथा नए हिस्सों के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुविधाजनक और निर्बाध हो जाएगा.

