औद्योगिक विकास से संबंधित नवीनतम सर्वे में सामने आए आंकड़े
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : वर्तमान समय में वैश्विक तनाव और परिस्थितियों से पार पाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। हालांकि भारतीय सरकार ने विकसित भारत के लिए मिशन 2047 तय किया हुआ है। लेकिन अभी विकास के इस रास्ते में ऐसी बहुत सारी बाधाएं हैं जिससे भारतीय उद्योग को पार पाना होगा।
इससे संबंधित के एक नवीनतम रिपोर्ट भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने पेश करते हुए कहा है कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए किफायती और पारदर्शी तरीके से उद्योगों की औद्योगिकी भूमि तक पहुंच जरूरी है। इंडस्ट्री बॉडी ने अपनी रिपोर्ट ‘सीआईआई लैंड मिशन: फ्रेमवर्क टू रिफॉर्म इंडस्ट्रियल लैंड मैनेजमेंट इन इंडिया’ में औद्योगिक भूमि पारिस्थितिकी तंत्र में संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
मेक इन इंडिया के सपने को साकार करना जरूरी
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के तहत भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षाओं को तब तक साकार नहीं किया जा सकता जब तक कि औद्योगिक भूमि पूवार्नुमानित, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो जाए।’ उन्होंने कहा, ‘सीआईआई लैंड मिशन एक व्यावहारिक, कार्यान्वयन केंद्रीय ढांचा प्रदान करता है जो सामाजिक सुरक्षा उपायों का सम्मान करते हुए भूमि मूल्य श्रृंखला में समय दक्षता, पूवार्नुमान और समन्वय को बढ़ाता है।’
औद्योगिक भूमि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद के लिए एक मूलभूत संसाधन बनी हुई है। हालांकि, विभिन्न राज्यों में वर्तमान परिदृश्य खंडित प्रक्रियाओं, जटिल नियामक व्यवस्था, अस्पष्ट भूमि स्वामित्व, विलंबित कब्जे और आवंटित भूखंडों के अल्पउपयोग से ग्रस्त है। रिपोर्ट में बताया गया कि ये चुनौतियां पूंजी की लागत को काफी बढ़ा देती हैं, परियोजनाओं के चालू होने में देरी करती हैं और निवेशकों के विश्वास को कम करती हैं।

