प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ता बढ़ता सार्वजनिक कर्ज बन रहा चिंता का कारण
India Economy Growth (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : लगातार बदलते वैश्विक भू राजनीतिक व आर्थिक परिवेश के बीच भारत लगातार अपनी विकास दर को हासिल करने में कामयाब रहा है। यह कहना है आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का। उन्होंने कहा कि भारतीय वित्तीय बाजारों में पिछले वर्षों में नीतिगत सुधारों के कारण परिपक्वता आई है, लेकिन अभी और सुधार की जरूरत है।
आरबीआई वित्तीय बाजारों को और गहरा करने, भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के प्रयास जारी रखेगा। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की मैक्रोइकोनॉमिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
2021 से इस तरह रही विकास दर
भारत की आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए गवर्नर ने बताया कि 2021-25 के दौरान देश की औसत विकास दर 8.2% रही है। 2025-26 में 7.6% और 2026-27 में 6.9% की वृद्धि का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉरपोरेट बैलेंस शीट्स मजबूत हुई हैं और पिछले दो वर्षों में पूंजी बाजारों के जरिए फंड जुटाने में भी तेजी आई है, जो अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त समर्थन दे रही है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ता सार्वजनिक कर्ज और रक्षा खर्च वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग का सहारा
नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम में आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू खपत और लगातार सार्वजनिक निवेश का सहारा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर जोर से निजी निवेश को बढ़ावा मिला है और उत्पादन क्षमता का विस्तार हुआ है।
इसलिए जताई चिंता
गवर्नर ने वैश्विक स्तर पर जारी वित्तीय विस्तार और बढ़ते रक्षा खर्च को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, इससे कई देशों की राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, उन्होंने तकनीकी क्षेत्र समेत कुछ परिसंपत्ति वर्गों में ऊंचे मूल्यांकन को भी बाजार के लिए संभावित खतरा बताया। मल्होत्रा ने कहा कि सप्लाई चेन में व्यवधान और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर पहले ही आर्थिक गतिविधियों पर दिख रहा है।

