अगर संघर्ष लंबा चला तो ग्लोबल मंदी की आशंका : गोरिन्शास
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ था तो शायद किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि यह इतना लंबा चलेगा। इसे शुरू हुए दो माह से ज्यादा समय हो चुका है। इस युद्ध में न तो ईरान की हार हुई है और न ही अमेरिका की जीत। फिलहाल वर्तमान में दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ हमले नहीं कर रहे लेकिन स्थिति नाजुक है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की वजह से कच्चे तेल के उत्पादन पर प्रतिकूल असर हुआ है। इसके चलते पूरे विश्व में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी बीच अंतरराष्टÑीय मुद्रा कोष ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिन्शास ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ग्लोबल आर्थिक ग्रोथ रेट गिरकर करीब 2% तक आ सकती है, जिसे आम तौर पर ग्लोबल मंदी माना जाता है। उन्होंने बताया कि जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल वैश्विक महंगाई 4.1% से घटकर 3.8% हो जाएगी, लेकिन अब 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है।
युद्ध में अमेरिका को लगा बड़ा आर्थिक झटका
वहीं हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि अमेरिका ने इस युद्ध पर करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 95 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। हालांकि अमेरिकी सरकार ने 25 अरब डॉलर खर्च करने की बात कही है। हालांकि युद्ध में हुए खर्च के बाद अमेरिका को भी आर्थिक मोर्चे पर झटका लगा है। जानकारी के अुनसार अमेरिका में महंगाई लगातार बढ़ रही है। लोग ट्रंप प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।
चीन और रूस को हुआ युद्ध से फायदा
एक तरफ जहां इस युद्ध में अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ा है वहीं दूसरी तरफ से इस जंग से चीन और रूस को फायदा मिल रहा है। चीन इस जंग से अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिख रहा है। चीन ने पहले ही तेल के भंडार जोड़ रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी कई दशकों पहले से ध्यान दे रहा था। साथ ही, अमेरिका की छवि कमजोर होने से उसे कूटनीतिक फायदा मिला है।
चीन की तेल और गैस कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं। उठठ के मुताबिक, 6 बड़ी कंपनियां इस साल 94 अरब डॉलर तक का फायदा कमा सकती हैं। इसके अलावा इस जंग से रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता दिख रहा है। तेल और खाद की ऊंची कीमतों की वजह से रूस की कमाई बढ़ी है।
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