नई दिल्ली. क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शुमार सर गारफील्ड सोबर्स का 89 साल की उम्र में निधन हो गया. 28 जुलाई को 90 साल के होने वाले इस महान खिलाड़ी के निधन से फैंस में शोक की लहर है. जन्मदिन से लगभग दो सप्ताह पहले उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से विश्व क्रिकेट ने अपने सबसे महान ऑलराउंडरों में से एक को खो दिया है. सर गारफील्ड सोबर्स ने 1954 से 1974 तक वेस्टइंडीज की टीम के लिए खेला. उन्होंने दो दशक लंबे करियर में क्रिकेट की दुनिया में अपना लोहा मनवाया. गैरी ने 93 टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों डिपार्टमेंट में दमदार प्रदर्शन किया.
बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज सोबर्स ने टेस्ट क्रिकेट में 8032 रन बनाए. इस दौरान उनका औसत 57.78 रहा और उन्होंने 26 शतक जड़े. साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 365 रन की ऐतिहासिक पारी ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर का विश्व रिकॉर्ड बनाया था. यह रिकॉर्ड करीब 36 सालों तक कायम रहा. सोबर्स फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास में एक ओवर में छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बने थे. इसे आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार कारनामों में गिना जाता है.

सर गारफील्ड सोबर्स सिर्फ महान बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि बेहद बहुमुखी गेंदबाज भी थे. वह लेफ्ट आर्म फास्ट-मीडियम, ऑफ स्पिन और चाइनामैन (रिस्ट स्पिन) तीनों तरह की गेंदबाजी करने में माहिर थे. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट अपने नाम किए, जबकि स्लिप और क्लोज-इन पोजीशन पर शानदार फील्डिंग करते हुए 109 कैच भी लपके.
सोबर्स ने वेस्टइंडीज की 39 टेस्ट मैचों में कप्तानी की. क्रिकेट में उनके योगदान के लिए 1975 में नाइटहुड (Sir की उपाधि) से सम्मानित किया गया. सर गारफील्ड सोबर्स को “किंग क्रिकेट” के नाम से जाना जाता था. क्रिकेट की प्रतिष्ठित पत्रिका Wisden ने भी उन्हें खेल के इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शामिल किया. सर डॉन ब्रैडमैन के बाद सोबर्स उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे जिन्हें सबसे अधिक बार साल का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर माना गया.

