RBI Repo Rate Hike News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। अगर आप होम लोन, कार लोन या किसी अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI चुका रहे हैं, तो आरबीआई के फैसले का असर आप पर भी पड़ेगा। RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई MPC बैठक में सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया। RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों को सख्त किया जा सकता है।
तीन साल बाद बढ़ा रेपो रेट
RBI ने लंबे समय बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था। उसके बाद कई बैठकों में केंद्रीय बैंक ने दर को स्थिर रखा था। अगस्त 2026 की MPC बैठक में भी रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया था। अब 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.50 फीसदी हो गया है। RBI का यह कदम ऐसे समय आया है, जब महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। RBI का यह फैसला आम लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।
महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI inflation का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। पहले यह अनुमान 5 फीसदी था। RBI के नए अनुमान के अनुसार दूसरी तिमाही यानी Q2 में CPI महंगाई 4.9 फीसदी, तीसरी तिमाही यानी Q3 में 6 फीसदी और चौथी तिमाही यानी Q4 में 5.7 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 फीसदी रखा गया है। RBI ने महंगाई के बढ़ते जोखिम के पीछे खाद्य और ईंधन की कीमतों के साथ-साथ कमजोर मानसून, अल नीनो और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चिंताओं को भी ध्यान में रखा है।
आपकी EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट बढ़ने का असर सबसे पहले उन कर्जदारों पर पड़ सकता है, जिनका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा हुआ है। रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए फंडिंग की लागत बढ़ सकती है और वे इसका असर ग्राहकों की ब्याज दरों पर डाल सकते हैं। अगर बैंक अपने लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं तो होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ सकती है। कुछ मामलों में बैंक EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं। आपकी वास्तविक EMI पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका बैंक ब्याज दर में कितनी बढ़ोतरी करता है और आपका लोन किस बाहरी बेंचमार्क या ब्याज दर व्यवस्था से जुड़ा है।
कितना बढ़ सकता है EMI का बोझ?
मान लीजिए किसी व्यक्ति का फ्लोटिंग रेट होम लोन है और बैंक RBI के 0.25 फीसदी रेपो रेट बढ़ने का पूरा असर ब्याज दर में डाल देता है। ऐसी स्थिति में लोन की ब्याज दर में भी करीब 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। EMI में वास्तविक बदलाव लोन की बकाया रकम, बची हुई अवधि और मौजूदा ब्याज दर पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी देखकर यह कहना सही नहीं है कि हर व्यक्ति की EMI भी ठीक 0.25 फीसदी बढ़ेगी।

