
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में झूठे मुकदमों पर भी जताई चिंता
Supreme Court, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी की जंग के दौरान एक नाबालिग बच्चे के जरिए उसकी बुआ पर दर्ज कराए गए झूठे पोक्सो केस को रद्द कर दिया है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पारिवारिक दुश्मनी निकालने के लिए बच्चों को मोहरा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह पूरा मामला एक कड़वे तलाक और बच्चों की कस्टडी की जंग से जुड़ा है। एक तलाकशुदा मां ने अपने ही नाबालिग बेटे की तरफ से उसकी बुआ (पिता की बहन) पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले यौन उत्पीड़न (पोक्सो मामले के तहत) के आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गहराई से पड़ताल की और पाया कि यह एफआइआर किसी वास्तविक अपराध का परिणाम नहीं, बल्कि पिता द्वारा दर्ज कराई गई एक अन्य शिकायत के जवाब में केवल बदला लेने की नीयत से रचा गया षड्यंत्र थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले की भी आलोचना की
कोर्ट ने पाया कि जब सितंबर 2023 में आपसी सहमति से तलाक हुआ था, तब ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया था। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए बच्चे के बयान में भी इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले की भी आलोचना की जिसमें बिना रिकॉर्ड की ठीक से समीक्षा किए मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया गया था।
इसने स्पष्ट किया कि जब न्याय प्रक्रिया का इस तरह से निजी हित साधने के लिए दुरुपयोग किया जाने लगे, तो न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती। मामले की पैरवी कर रही वकील सना रईस खान ने कोर्ट को बताया कि यह मुकदमा कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जस्टिस जेबी पाडीर्वाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पुणे के खडकी पुलिस स्टेशन में दर्ज पोक्सो और आईपीसी की धाराओं के तहत बुआ के खिलाफ दर्ज एफआइआर को पूरी तरह से रद कर दिया है।
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