कहा- फुटपाथ पर राहगीरों का हक सबसे पहले
Supreme Court, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में चलने के अधिकार को संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि फुटपाथों पर पैदल चलने वालों का हक, सड़कों पर मोटर वाहनों की आवाजाही से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह फैसला एक एक्सीडेंट केस में आया, जिसमें एक पिता ने अपने 5 साल के बेटे को खो दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की रकम बढ़ाकर 11,44,628 रुपए कर दी। और इसे कम करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (डी) (देश में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने की आजादी) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत पूरी तरह संरक्षित है।
पैदल चलने वालों को परेशानी समझते है ड्राइवर
बेंच ने कहा, पहियों वाली मशीनें सिर्फ अमीरों के लिए थीं, लेकिन जैसे-जैसे इकॉनमी आगे बढ़ी और सस्ती मोटर गाड़ियां आई, मोटर वाले ट्रांसपोर्ट का पूरा स्पेक्ट्रम सड़कों पर हावी हो गया, पैदल चलने वालों को इस हद तक किनारे कर दिया गया कि उन्हें ड्राइवरों के लिए एक परेशानी माना जाने लगा, जो रेगुलर पैदल चलने वालों और उनके फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ा देते हैं।
अब से यह बंद होना चाहिए क्योंकि हम मोटर वाली सड़कों के साथ-साथ तय फुटपाथों पर चलने के फंडामेंटल राइट की घोषणा करते हैं। इसका उल्लंघन होने पर नागरिक जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर सकते हैं। यह उपाय मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत मौजूद उपायों से अलग होगा।
मौलिक अधिकार को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी बनाना जरूरी
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, तय फुटपाथ पर चलने के मौलिक अधिकार को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी बनाना जरूरी है। हमेशा काम करने वाली और लगातार बनी रहने वाली ऐसी रेगुलेटरी बॉडी संस्थागत जानकारी विकसित और सुरक्षित रखेगी, ताकि वह अपने जमा किए और प्रोसेस किए गए अनुभव, डेटा और जानकारी के आधार पर काम कर सके।
बेंच ने कहा कि संस्थागत विशेषज्ञता बहुत जरूरी है और ऐसी रेगुलेटरी बॉडी खास जानकारी और हुनर वाले लोगों को काम पर रखेगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस फैसले की कॉपी केंद्र सरकार, आवास और शहरी मामलों, ग्रामीण विकास और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों को भेजे ताकि जरूरी कानूनी ढांचा शुरू करने की जरूरत पर विचार किया जा सके।
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