फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में घरों से निकलने वाला गीला कचरा अक्सर कूड़ेदान तक पहुंच जाता है. फल और सब्जियों के छिलके भी इसी कचरे का हिस्सा बनते हैं, लेकिन शहर की 54 साल की सुचिता साहू इन्हीं छिलकों को बेकार समझने के बजाय काम की चीज बना रही हैं. नींबू, संतरा, मौसमी, केला और आम जैसे फलों के छिलकों से वह बायो एंजाइम तैयार करती हैं. इसके बाद इसी से घर की सफाई में काम आने वाले कई सामान बनाती हैं. सुचिता की यह कोशिश अब उनके घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई दूसरे लोग भी उनसे यह काम सीखकर अपने लिए रोजगार का रास्ता बना रहे हैं.
लोकल 18 से सुचिता बताती हैं कि घर में बचने वाले छिलकों के साथ जूस की दुकानों से मिलने वाले छिलके भी जमा किए जाते हैं. इसके लिए 300 ग्राम छिलके, एक लीटर पानी और 100 ग्राम गुड़ लिया जाता है. घर में आसानी से समझने के लिए एक कटोरी गुड़, तीन कटोरी छिलके और 10 कटोरी पानी लिया जा सकता है. छिलके, पानी और गुड़ को एक साथ मिलाकर प्लास्टिक के जार में रखना होता है. जार को अच्छी तरह बंद करके छांव वाली जगह पर रखना चाहिए. शुरुआती 20 से 25 दिनों में अंदर गैस बनती है, इसलिए रोज ढक्कन थोड़ा ढीला करके गैस बाहर निकालनी पड़ती है. करीब 90 दिन बाद इसमें तैयार तरल को अलग कर इस्तेमाल किया जाता है.
सुचिता साहू बताती हैं कि इस तरह तैयार बायो एंजाइम से फर्श, टॉयलेट, कांच और दूसरी सतहों की सफाई के लिए सामान बनाया जाता है. कपड़े धोने के लिए लॉन्ड्री वॉश भी तैयार होता है. घर में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक सामान को कम करने की कोशिश से कचरा और रसायनों का इस्तेमाल दोनों घटाए जा सकते हैं. सुचिता कहती हैं कि पर्यावरण के लिए काम करने की रुचि मुझे बचपन से रही है. पहले घर में ही जैविक कचरे से खाद बनाने का काम करती थी और आज भी मैं रसोई से निकलने वाले छिलकों से खाद बनाती हूं. मैंने लाइब्रेरियन के तौर पर काम किया. इसी दौरान मुझे बायो एंजाइम के बारे में पता चला और बेंगलुरु की एक संस्था से ऑनलाइन प्रशिक्षण लेकर मैने इसे बनाना सीखा.
कितने रुपये कीमत
सुचिता साहू बताती हैं कि अब वे 12 से 13 तरह के सामान तैयार करती हूं. इनमें टॉयलेट क्लीनर, सरफेस क्लीनर, ग्लास क्लीनर, लॉन्ड्री वॉश और चीटियां, छिपकली तथा कॉकरोच को दूर रखने वाला सामान शामिल है. पालतू जानवरों के आसपास छिड़काव के लिए भी अलग लिक्विड तैयार किया है. सामान की कीमत 100 रुपये से शुरू होती है. लॉन्ड्री वॉश की एक लीटर बोतल 230 रुपये में मिलती है. अब तक हजारों किलो छिलकों का इस्तेमाल किया जा चुका है. एक हजार से ज्यादा लोगों को यह काम सिखा चुकी हूं और कई लोग प्रशिक्षण लेने के बाद इससे अपनी कमाई कर रहे हैं.
मकसद पैसा कमाना नहीं
सुचिता साहू बताती हैं कि यह काम पैसे कमाने के लिए शुरू नहीं किया था. मेरा मकसद घर के कचरे को दोबारा इस्तेमाल करना और पर्यावरण को बचाना था. आज यही काम दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का जरिया बन रहा है. सुचिता कहती हैं कि नई शुरुआत के लिए उम्र मायने नहीं रखती. सीखने की इच्छा हो तो किसी भी उम्र में अपने काम से नई पहचान बनाई जा सकती है.