भारत में प्लास्टिक बैंकनोट लाने की प्रकिया तेज हो गई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि देश में पहली बार ऐसे नोट लाए जा रहे हैं। इससे पहले भी इन नोटों को चलाने के प्रयास हुए हैं, लेकिन अलग-अलग वजहों से यह पहल सफल नहीं हो सकी। इस रिपोर्ट में हम प्लास्टिक नोट का पूरा भूगोल-इतिहास जानेंगे।
क्या होते हैं प्लास्टिक बैंकनोट?
प्लास्टिक बैंकनोट को को आधिकारिक तौर पर पॉलिमर बैंकनोट कहा जाता है। ये पतले, फ्लेक्सिबल प्लास्टिक सब्सट्रेट से बने होते हैं जिसे पॉलिमर कहा जाता है। भले ही ये प्लास्टिक के होते हैं, लेकिन क्रेडिट या डेबिट कार्ड जैसे हार्ड नहीं होते हैं। पॉलिमर नोट काफी हल्के और लचीले होते हैं, जिन्हें आसानी से कागज वाले पारंपरिक नोट की तरह ही मोड़ा जा सकता है।
प्लास्टिक बैंकनोट के फायदे?
प्लास्टिक बैंकनोट काफी टिकाऊ होते हैं। कागज वाले नोट की तुलना में ये नोट लंबे समय तक चलते हैं, क्योंकि धूल, नमी और मुड़ने का इन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। इससे इन्हें लंबे समय तक बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा, प्लास्टिक बैंकनोट को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इनकी नकल करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि इनमें माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम, सी-थ्रू विंडो और स्पेश्लाइज्ड लिंक जैसे सुरक्षा से जुड़े इनबिल्ट फीचर्स होते हैं।
RBI का प्लास्टिक बैंकनोट पर जोर क्यों?
आरबीआई काफी लंबे समय से प्लास्टिक बैंकनोट लाने का प्रयास कर रहा है। इसकी वजह यह है कि हाल के वर्षों में करेंसी की मांग काफी बढ़ गई है। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में करेंसी प्रिटिंग की लागत बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024 में महज 5,101.4 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, चलन से बाहर हुए खराब नोटों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ वित्त वर्ष 2025 में ही 23.8 अरब खराब नोटों को चलन से बाहर किया गया, जिनमें ज्यादातर नोट 500 रुपये और 100 रुपये के थे।
भारत पहले क्यों नहीं लाया?
साल 2012 में केंद्र सरकार ने चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के एक अरब नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी थी। इनमें अलग-अलग भूगोल और जलवायु वाले कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला जैसे शहर शामिल थे। हालांकि, तकनीकी और ऑपरेशनल चुनौतियों की वजह से यह ट्रायल सफल नहीं हो सका। सबसे बड़ी चुनौती एटीएम में इन नोटों की पहचान और निकालने से जुड़ी थी।
क्या बंद हो जाएगी पेपर करेंसी?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पॉलिमर नोट जल्द लाने पर विचार कर रहा है। सारे नोटों को एक ही बार में नहीं बदला जाएगा। केंद्रीय बैंक मार्केट में व्यापक तौर पर इन नोटों को चलन में लाने से पहले एक पायलट प्रोजेक्ट करेगा। पहले 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा, क्योंकि ये नोट सबसे ज्यादा चलने में हैं और सबसे ज्यादा खराब होते हैं। अगर सबकुछ सही रहा, तो अधिक मूल्य वाले नोट बाजार में लाए जाएंगे।
किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?
दुनियाभर में 60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक बैंकनोट चलन में हैं। कुछ देशों में पूरी तरह यही नोट हैं, तो कुछ देशों में आंशिक तौर पर ये नोट चलन में हैं। ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले साल 1988 में पॉलिमर बैंकनोट जारी किया था। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रोमानिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने पॉलिमर नोटों को अपनाया।

