Punjab University PhD Student Death: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़-लिखकर बड़ा मुकाम हासिल करे. हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक किसान परिवार ने भी यही सपना देखा था.परिवार की बेटी ज्योति पढ़ाई में इतनी होनहार थी कि उसने NET-JRF, CTET जैसी कठिन परीक्षाएं पास कर ली थीं और पंजाब यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी में PhD कर रही थी. कुछ ही महीनों बाद वह अपने परिवार की पहली PhD डिग्री हासिल करने वाली थी और आगे चलकर प्रोफेसर बनना चाहती थी लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही एक दर्दनाक हादसे ने उसके सारे सपने हमेशा के लिए छीन लिए.पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में ज्योति की मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसा करंट लगने से हुआ.
गर्ल्स हॉस्टल के पास मिला शव
28 वर्षीय ज्योति पंजाब यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोध कर रही थीं. उनका शव गर्ल्स हॉस्टल-8 के पास सड़क किनारे एक बिजली के खंभे के पास मिला. यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से यह हादसा हुआ हो सकता है.घटना के समय वहां मौजूद कुछ लोगों ने वीडियो भी बनाया. इस घटना के बाद देश की प्रतिष्ठित पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. बता दें कि पंजाब यूनिवर्सिटी भारत सरकार की एनआईआरएफ रैंकिंग में देश की शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल है और वर्तमान में 35वें स्थान पर है.
मां से फोन पर बात करते-करते अचानक आई चीख
ज्योति के परिवार के लिए सबसे दर्दनाक पल वह था जब उनकी मां फोन पर बेटी से बात कर रही थीं.
ज्योति के मामा सतीश कुमार ने बताया कि हादसे के समय वह अपनी मां से फोन पर बात कर रही थीं. बातचीत के दौरान अचानक उनकी मां ने ज्योति की तेज चीख सुनी और कुछ ही सेकंड बाद फोन कट गया. इसके बाद परिवार को जो खबर मिली उसने सब कुछ बदल दिया.परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि आखिर उनकी बेटी की मौत कैसे हुई.
परिवार ने उठाए कई सवाल,सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी
ज्योति के परिवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई सवाल पूछे हैं. उनका कहना है कि अगर करंट लगने से मौत हुई है तो कैंपस में खुले बिजली के तार क्यों थे? वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? जिस जगह हादसा हुआ, वहां सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए?परिजनों ने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें अपनी बेटी की मौत की सच्चाई जाननी है.
किसान परिवार की पहली बेटी थी जो PhD कर रही थी
ज्योति का परिवार साधारण किसान परिवार है. उनके पिता रविंद्र खेती-बाड़ी करते हैं और परिवार की आर्थिक मदद के लिए एक निजी स्कूल में ड्राइवर की नौकरी भी करते हैं.ऐसे परिवार से निकलकर ज्योति ने जो मुकाम हासिल किया, वह पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व की बात थी. वह परिवार की पहली बेटी थीं जिसने PhD की पढ़ाई शुरू की थी.उनके चाचा जितेंद्र ने भावुक होकर कहा कि पूरे परिवार को ज्योति पर गर्व था. उसे छात्रवृत्ति के आधार पर दाखिला मिला था और वह हमेशा प्रोफेसर बनने की बात करती थी. किसी ने कभी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी इस तरह अचानक खत्म हो जाएगी.
NET-JRF, CTET और B.Ed भी कर चुकी थीं पास
ज्योति शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं. उन्होंने करकराला गांव के एसडी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद गुरुग्राम के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से बीएससी की.उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की. इसी दौरान उन्होंने UGC NET-JRF परीक्षा पास की जिसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में PhD में प्रवेश मिला.उन्होंने मेरठ से B.Ed भी किया और CTET परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की थी. साथ ही वे सरकारी नौकरियों की तैयारी भी कर रही थीं.
खेती को बेहतर बनाने पर कर रही थीं रिसर्च
ज्योति का बचपन से ही पेड़-पौधों और प्रकृति से गहरा जुड़ाव था. यही कारण था कि उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी में रिसर्च का विषय भी खेती और मिट्टी से जुड़ा चुना.उनकी रिसर्च गाइड के अनुसार ज्योति जैव उर्वरकों (बायोफर्टिलाइजर्स) की प्रभावशीलता पर शोध कर रही थीं. उनका शोध ऐसे सूक्ष्मजीवों पर आधारित था जो धान और पराली जैसी फसलों में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पौधों तक पोषक तत्व बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद करते हैं.माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नवीन गुप्ता ने उन्हें विभाग की सबसे प्रतिभाशाली शोधार्थियों में से एक बताया. विभाग के शिक्षकों का कहना है कि उनका शोध तेजी से आगे बढ़ रहा था और उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल था.
घर जाकर परिवार को सुनाती थीं अपने सपने
परिवार के अनुसार ज्योति जब भी घर आती थीं तो अपनी रिसर्च, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बात करती थीं. उनका एक ही सपना था-PhD पूरी करके कॉलेज में प्रोफेसर बनना और अपने परिवार का नाम रोशन करना.आज वही सपना अधूरा रह गया.
पिता दो बार बेहोश हुए, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ज्योति अपने पीछे अपने माता-पिता और छोटे भाई को छोड़ गई हैं. उनका छोटा भाई आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद गुरुग्राम के मानेसर में नौकरी करता है.बेटी की मौत की खबर सुनते ही उनके पिता रविंद्र दो बार बेहोश हो गए. पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप
ज्योति की मौत के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक इंजीनियर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया.छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पहले भी सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
