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    Home»पंजाब»केंद्र को 18 वर्ष बाद योजना बदलने के बजाय मनरेगा कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए था: तरुनप्रीत सिंह सौंद
    पंजाब

    केंद्र को 18 वर्ष बाद योजना बदलने के बजाय मनरेगा कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए था: तरुनप्रीत सिंह सौंद

    श्वेता चौहानBy श्वेता चौहानJuly 21, 2026No Comments5 Mins Read
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    चंडीगढ़ : पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर हाल ही में शुरू की गई वीबी-जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) योजना के तहत मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। उन्होंने कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी नीति बनाने की भी अपील की।

    मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के 2100 से अधिक मनरेगा कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने नई योजना का वित्तीय बोझ राज्यों पर डालने तथा कर्मचारियों के भविष्य को अनिश्चित बनाने के केंद्र सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए लंबित वेतन तुरंत जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशकों से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को समर्पित भाव से लागू कर रहे कर्मचारियों की 18 वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    आज यहां पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, “यह अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है और पूरी तरह भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है। हालांकि कांग्रेस, अकाली दल और पंजाब भाजपा सहित सभी विपक्षी दल इस मुद्दे से ध्यान भटकाने और लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पूरा दोष पंजाब सरकार पर मढ़ा जा सके। इसलिए आवश्यक है कि सच्चाई और तथ्य जनता के सामने रखे जाएं।”

    उन्होंने कहा, “मनरेगा योजना वर्ष 2005 के आसपास एक अधिनियम के तहत शुरू की गई थी, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को रोजगार उपलब्ध कराना था। पंजाब में यह योजना लगभग 18 वर्षों से लागू है और इसके माध्यम से ग्रामीण लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।”

    मंत्री ने बताया कि इस योजना के संचालन के लिए लगभग 2000 से 2100 कर्मचारी, जिनमें तकनीकी सहायक (टीए), ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं, पिछले 18 वर्षों से केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा, “इन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश में मौजूदा मनरेगा योजना को बंद कर दिया और घोषणा कर दी कि 1 जुलाई से नई योजना लागू होगी।”

    इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए सोंद ने कहा, “सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इन कर्मचारियों द्वारा पिछले 18 वर्षों में की गई मेहनत को एक झटके में कैसे समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने इतने वर्षों तक केंद्र सरकार के अधिनियम और उसकी योजना के तहत कार्य किया। इस योजना में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।”

    उन्होंने कहा, “इन कर्मचारियों का वेतन पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था क्योंकि यह शत-प्रतिशत केंद्र सरकार की योजना थी। लेकिन उनके अधिकारों की रक्षा करने के बजाय केंद्र ने योजना ही बंद कर दी, जिससे लगभग 2100 कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

    मंत्री ने कहा, “कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे नई योजना के तहत काम नहीं करना चाहते, क्योंकि 18 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें यह भरोसा नहीं है कि उन्हें कब नियमित किया जाएगा। उनकी मांग पूरी तरह जायज है।”

    तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, “मैं पूरी स्पष्टता के साथ कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार, पूरी कैबिनेट और संपूर्ण सरकार मनरेगा के तहत कार्यरत इन 2100 कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। हम उनके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। केंद्र सरकार ने 18 वर्ष तक उनसे काम लेने के बाद योजना बंद कर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन किया है।”

    उन्होंने जोर देते हुए कहा, “पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री के रूप में मैंने केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से मैंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह जागे और लगभग दो दशकों से कार्यरत इन कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करते हुए उन्हें नियमित करे, क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार की योजना के लिए अपने जीवन के 18 वर्ष समर्पित किए हैं।”

    ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा गया पत्र

    भारत सरकार ने अचानक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद कर 1 जुलाई से उसके स्थान पर विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू कर दी है। इस नई योजना के तहत केंद्र सरकार ने वित्तीय बोझ देश की सभी राज्य सरकारों पर डाल दिया है।

    पिछले लगभग दो दशकों से मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत मेहनती कर्मचारियों को अब भारत सरकार नई योजना के तहत संविदा आधार पर कार्य जारी रखने के लिए बाध्य कर रही है। मेरे गृह राज्य पंजाब में ये कर्मचारी हड़ताल पर हैं क्योंकि मनरेगा को बंद किए जाने से उनकी आजीविका संकट में पड़ गई है।

    उनके आंदोलन और हड़ताल का मुख्य कारण यह है कि पिछले 18 वर्षों से सेवा दे रहे 2100 से अधिक संविदा कर्मचारी, जिनमें तकनीकी सहायक, कंप्यूटर सहायक तथा अन्य कर्मचारी शामिल हैं, मांग कर रहे हैं कि नई योजना के तहत उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए।

    पंजाब सरकार उनकी इस न्यायोचित मांग का समर्थन करती है। साथ ही आपसे आग्रह करती है कि नई योजना में ऐसा प्रावधान शामिल किया जाए जिससे इन सभी कर्मचारियों को नियमित किया जा सके। यह केवल पंजाब का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के अनेक कर्मचारी इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

    हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार देशभर के इन कर्मचारियों को स्थायी रोजगार प्रदान करे। पंजाब सरकार इस संबंध में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

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