आरबीआई गवर्नर ने दिए ब्याज दरें स्थिर रखने के संकेत
RBI-MPC Meeting (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बाद पश्चिमी एशिया में बिगड़े हालात पर आरबीआई की नजर है। इसका असर तीन जून को होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) में भी दिखाई देगा। एक तरफ जहां आरबीआई इस बैठक में पश्चिम एशिया तनाव के कारण महंगाई और आर्थिक प्रभाव को कम करने पर मंथन करेगा वहीं यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक में आरबीआई रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही रख सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि ब्याज दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ज्ञात रहे कि आरबीआई की यह बैठक 3-5 जून को होगी।
हालात पर बारीकी से नजर रख रहा आरबीआई
बाजार के जानकारों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जून एमपीसी में केंद्रीय बैंक अपना सतर्क रुख बनाए रखेगा और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और कमोडिटी की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय बाजारों पर उनके प्रभावों पर बारीकी से नजर रखेगा, उसके बाद ही कोई नीतिगत कदम उठाएगा।
बैठक में लिए फैसलों की घोषणा पांच जून को होगी
तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के फैसले का ऐलान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को करेंगे। समिति ने अप्रैल में हुई अपनी पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, जिसका कारण भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितताएं और मुद्रास्फीति एवं विकास संभावनाओं पर उनके संभावित प्रभाव थे।
आरबीआई के सामने हैं कई चुनौतियां
हालांकि, ब्याज दरों में यथास्थिति बने रहने की संभावना सबसे अधिक है, लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अपने व्यापक आर्थिक अनुमानों में संशोधन कर सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में लगातार व्यवधान और बाहरी कारकों के कारण रुपए पर दबाव, आरबीआई को चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति पूवार्नुमान को बढ़ाने और जीडीपी वृद्धि अनुमानों में कटौती करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अस्थिर वैश्विक परिदृश्य के बीच केंद्रीय बैंक मौजूदा नीतिगत दर को बनाए रखेगा।

