Stock Market Today News: लंबे वीकेंड के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने धमाकेदार शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को सपोर्ट मिला। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 72,390 के स्तर तक पहुंचा, जबकि Nifty 50 करीब 0.6% बढ़कर 22,556 पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में था। 5 अक्टूबर को कारोबार शुरू होने से पहले Nifty लगातार आठ हफ्तों की गिरावट झेल चुका था। ऐसे में सोमवार की तेजी को निवेशकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी
सोमवार सुबह सेंसेक्स में करीब 0.67% की तेजी देखी गई, जबकि Nifty 50 करीब 0.6% ऊपर कारोबार कर रहा था। बाजार में तेजी व्यापक रही और 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 13 हरे निशान में थे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी करीब 0.9% की बढ़त रही। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर बाजार की तेजी में आगे रहे। बैंकिंग इंडेक्स में करीब 1.1% और फाइनेंशियल इंडेक्स में करीब 1% की बढ़त दर्ज की गई।
HDFC बैंक और बजाज फाइनेंस में तेजी
बाजार की नजर कुछ प्रमुख शेयरों पर भी रही। HDFC बैंक के शेयरों में करीब 1% की तेजी आई। बैंक ने अनूप बागची को तीन साल के कार्यकाल के लिए नया CEO नियुक्त किया है। वहीं बजाज फाइनेंस के शेयरों में करीब 3.6% की तेजी देखने को मिली। कंपनी ने सितंबर तिमाही में नए लोन बुकिंग में सालाना आधार पर 11% की बढ़ोतरी दर्ज की है। इन कंपनियों के मजबूत अपडेट ने फाइनेंशियल सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद की।
बाजार को ग्लोबल संकेतों से मिला सहारा
भारतीय बाजार की तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिका से आए रोजगार संबंधी कमजोर आंकड़े हैं। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने से बच सकता है। अब बाजार अक्टूबर में अमेरिकी दर बढ़ोतरी की संभावना को 20% से भी कम मान रहा है। इससे वैश्विक शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। एशियाई बाजारों में भी सोमवार को मजबूती देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमत अभी भी चिंता
भारतीय बाजार के लिए सभी संकेत सकारात्मक नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 101.52 डॉलर प्रति बैरल पर था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
RBI की MPC बैठक पर सभी की नजर
इस सप्ताह शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू ट्रिगर RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक है। बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चल रही है और RBI 7 अक्टूबर को अपने फैसले का ऐलान करेगा। अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात की मजबूत उम्मीद है कि RBI इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा। यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर बढ़ोतरी होगी।
महंगाई और तेल RBI के लिए बड़ी चुनौती
RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई और महंगे कच्चे तेल की है। अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.82% रही थी, जो RBI के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। इसके अलावा रुपये में कमजोरी और वैश्विक स्तर पर ऊंची ब्याज दरें भी RBI के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई के दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक को दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। फिलहाल शेयर बाजार में तेजी जरूर है, लेकिन निवेशकों के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं माना जा रहा। एक तरफ कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से Fed की दर बढ़ोतरी का डर कम हुआ है, वहीं दूसरी तरफ महंगा कच्चा तेल, ऊंची ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी बाजार पर दबाव बना सकते हैं।

