Punjab News: आज पंजाब के कर्मचारियों के लिए एक और ऐतिहासिक फ़ैसला लिया गया है। कैबिनेट की बैठक में 65,000 से ज़्यादा आउटसोर्स और कैज़ुअल कर्मचारियों को पक्का करने और कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को हमेशा के लिए खत्म करने की मंज़ूरी दे दी गई है। अब कोई बिचौलिया या ठेकेदार नहीं होगा, बल्कि हर कर्मचारी सीधे सरकार के अधीन काम करेगा और उनकी कमाई सीधे उनके बैंक खातों में आएगी। इसके साथ ही, फ़ायरमैन, सीवरमैन और लाइनमैन जैसे जोखिम भरे कामों में लगे कर्मचारियों को 5 साल की सेवा के बजाय सिर्फ़ 3 साल की सेवा के बाद ही पक्का करने का एक बड़ा फ़ैसला भी लिया गया है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया और DA (महंगाई भत्ता) से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति भी बनाई गई है। इसके अलावा, पंजाब में भ्रष्टाचार के मामलों का तेज़ी से निपटारा करने के लिए 7 नई विशेष अदालतें बनाने की मंज़ूरी भी दी गई है। आम लोगों और कर्मचारियों के अधिकारों को कुचलने के दिन अब खत्म हो गए हैं। ‘आपकी सरकार’ पंजाब के हर वर्ग के कल्याण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
पंजाब सरकार ने सरकारी नौकरियों में निजी ठेकेदारों की भूमिका को खत्म करके सरकार और कर्मचारियों के बीच सीधा रोज़गार संबंध बनाने का एक बड़ा फ़ैसला लिया है। इस कदम से उन हज़ारों कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और नियमितता मिलेगी जो सालों से सेवा कर रहे हैं। इस बदलाव को लागू करने के लिए कैबिनेट ने दो नए अध्यादेशों को मंज़ूरी दी है।
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इसके अलावा, बकाया महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन के मामलों को निपटाने के लिए कैबिनेट समिति का पुनर्गठन किया गया है और भ्रष्टाचार के मामलों की तेज़ी से सुनवाई के लिए सात विशेष अदालतें बनाने को भी हरी झंडी दे दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट ने 2016 के अधिनियम को रद्द करते हुए ‘पंजाब राज्य आउटसोर्स कर्मचारी (संविदात्मक नियुक्ति में परिवर्तन) विधेयक, 2026’ और ‘पंजाब संविदात्मक कर्मचारी (स्वीकृत रिक्तियों के विरुद्ध समायोजन) विधेयक, 2026’ को मंज़ूरी दे दी है। इससे आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के अधीन लाकर नियमित रोज़गार का रास्ता साफ़ हो जाएगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 65 हज़ार से ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपने जीवन के कीमती साल पंजाब की सेवा में बिताए हैं और अब उन्हें उनका हक़ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों और सरकार के बीच कोई ठेकेदार नहीं होगा। नई व्यवस्था के अनुसार, ग्रुप-C और ग्रुप-D के वे आउटसोर्स कर्मचारी जिन्होंने लगातार पाँच साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सीधे सरकारी अनुबंध के तहत लाया जाएगा। जबकि खतरनाक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों को तीन साल की सेवा के बाद पात्र माना जाएगा। CM मान ने कहा कि कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद, अध्यादेश राज्यपाल को भेजा जाएगा और फिर इसे मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा में एक विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।
