ITR-3 Deadine Alert: अगर आपकी कमाई का स्रोत बिजनेस, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी या शेयर बाजार में Futures & Options (F&O) ट्रेडिंग है और आपकी बुक्स टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आती हैं, तो 31 अगस्त की रात 12 बजे तक ITR-3 दाखिल करना जरूरी है. आखिरी समय में किसी गलती से बचने के लिए जानिए ITR-3 से जुड़ी अहम जानकारियां.
किन लोगों के लिए जरूरी है ITR-3?
ITR-1, ITR-2 और ITR-3 को लेकर अक्सर करदाताओं में भ्रम रहता है. यदि आपकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़ी है, तो ITR-3 लागू हो सकता है.
F&O और इंट्राडे ट्रेडर्स: Futures & Options या इंट्राडे ट्रेडिंग से होने वाला लाभ या नुकसान बिजनेस इनकम के रूप में माना जाता है.
फ्रीलांसर और कंसल्टेंट: जिनकी आय पर TDS कटा है, लेकिन वे प्रिजंप्टिव टैक्स व्यवस्था यानी ITR-4 का विकल्प नहीं अपना रहे हैं.
पार्टनरशिप फर्म के पार्टनर: फर्म से सैलरी, बोनस या ब्याज प्राप्त करने वाले पार्टनर्स.
बिजनेस करने वाले व्यक्ति या HUF: जिनकी बुक्स टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आतीं.
31 अगस्त की डेडलाइन चूकी तो क्या होगा?
समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर तीन बड़े वित्तीय नुकसान हो सकते हैं.
लेट फीस: Section 234F के तहत 31 अगस्त के बाद Belated ITR दाखिल करने पर 5000 रुपये तक शुल्क लग सकता है. 5 लाख रुपये से कम कुल आय वालों के लिए यह 1000 रुपये है.
बिजनेस लॉस का नुकसान: F&O या बिजनेस में हुए घाटे को भविष्य के वर्षों के मुनाफे के साथ सेट-ऑफ करने के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है.
ब्याज: बकाया टैक्स होने पर Section 234A के तहत 1% प्रति माह की दर से ब्याज लग सकता है.
ITR-3 भरते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान
AIS और TIS मिलाएं: TDS, डिविडेंड और शेयर ट्रेडिंग से जुड़े आंकड़ों का मिलान करें.
पुरानी या नई टैक्स रिजीम: बिजनेस इनकम होने पर Old Tax Regime चुनने के लिए Form 10-IEA से जुड़ी जानकारी सही भरें.
कैपिटल गेंस दर्ज करें: म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई आय संबंधित शेड्यूल में सही भरें.
ई-वेरिफिकेशन करें: रिटर्न जमा करने के बाद आधार OTP या नेट बैंकिंग से 30 दिनों के भीतर e-Verify करें.
आखिरी घंटे में आयकर विभाग के पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी परेशानी हो सकती है. इसलिए सभी दस्तावेज और AIS पहले से तैयार रखें और समय रहते ITR-3 फाइल करें.

