अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए हमलों ने आया नकारात्मक संदेश
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के एक दूसरे पर दोबारा से शुरू हुए हमलों ने उद्योग जगत की चिंता को बढ़ा दिया है। ज्ञात रहे कि एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि दोनों देश समझौते के नजदीक हैं वहीं मंगलवार व बुधवार को दोनों द्वारा एक दूसरे पर हमले करने का समाचार है।
इससे उद्योग जगत की चिंता बढ़ गई है क्योंकि होर्मुज बंद होने के चलते जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है और उद्योगों पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, कमजोर होता रुपया, बढ़ता चालू खाता घाटा (सीएडी) और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों ने आयात पर निर्भर कारोबारों की लागत को काफी बढ़ा दिया है। इसके अलावा, मजबूत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के बावजूद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत में निजी निवेश की स्थिति अभी भी असमान बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय की टीम करेगी सर्वेक्षण
देश के इतिहास में पहली बार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आर्थिक नीतियां बनाने और आगामी बजट की तैयारियों के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसके तहत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अब सीधे विनिर्माण इकाइयों (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) और इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स (औद्योगिक क्षेत्रों) का दौरा करेंगे। इसका मुख्य मकसद उद्योग जगत से सीधे फीडबैक लेना और पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हो रही चुनौतियों से निपटने के लिए जमीनी हकीकत को समझना है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की ओर से शुरू की गई इस पहल के तहत अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव या निदेशक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में अधिकतम पांच सदस्यों वाली टीमें बनाई जाएंगी।
ये टीमें अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में दो से तीन दिन का दौरा करेंगी। इन दौरों में बड़े, मझोले और छोटे कारखानों के अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और रिसर्च से जुड़े क्षेत्रों को भी कवर किया जाएगा। इसके साथ ही दिशा-निदेर्शों के अनुसार हर दौरे में कम से कम दो स्टार्टअप्स से मुलाकात करना भी अनिवार्य होगा। उद्योग संस्था ‘भारतीय उद्योग परिसंघ’ (सीआईआई) को इन मुलाकातों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि कंपनियां बेझिझक अधिकारियों से अपनी नीतियां और समस्याएं साझा कर सकें।
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