केंद्र सरकार बनाएगी 10 हजार करोड़ का एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड
Business News Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत की घरेलू विमानन कंपनियां पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने के चलते परेशानी में हैं। अंतरराष्टÑीय बाजारों में ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते इन्हें घाटा उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिसके चलते कई बड़ी कंपनियों ने अपनी उड़ानों की संख्या सीमित कर दी है। अब इन विमानन कंपनियों को ऐसे जोखिमों से बचाने के लिए केंद्र सरकार विशेष प्रयास करने जा रही है।
बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए घरेलू विमानन कंपनियों को बचाने के लिए 10,000 करोड़ रुपए का ‘एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ स्थापित करने का अहम फैसला किया गया है। एविएशन इंडस्ट्री लंबे समय से ईंधन की अस्थिर लागत से जूझ रही थी। यह फंड एयरलाइंस की परिचालन लागत को स्थिर रखने और मार्जिन को सुरक्षित करने में मददगार साबित होगा।
दो माह में 60 से बढ़कर 142 रुपए हुई कीमत
पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतें मार्च 2026 में 60.5 रुपये से बढ़कर मई 2026 में 142 रुपये प्रति लीटर हो गईं। एटीएफ एयरलाइंस की परिचालन लागत का 40 फीसदी है, जिससे एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियां प्रभावित हुईं। इस स्थिति से निपटने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी है। सरकार ने घरेलू परिचालन के लिए एटीएफ की कीमत 75.6 रुपये प्रति लीटर तय की है।
इस तरह काम करेगा नया फंड
यह आत्मनिर्भर कोष घरेलू व अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए उपलब्ध रहेगा। यह भारतीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ कीमतें स्थिर करेगा। इससे हवाई यात्रियों को किराए में वृद्धि से बचाया जा सकेगा और 77 लाख नौकरियों की रक्षा होगी। यह विमानन परिचालन को व्यवहार्य बनाए रखकर सार्वजनिक निवेश व कनेक्टिविटी को सुरक्षित रखेगा।

