नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट का एक दौर धीरे धीरे खत्म हो रहा है. विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट और टी20 को अलविदा कहा तो अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. रहाणे एक ऐसे खिलाड़ी रहे जो टीम के लिए हमेशा संकटमोचक बनकर सामने आए. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जब रोहित शर्मा टीम का हिस्सा नहीं थे और विराट कोहली बेटी के जन्म की वजह से दौरा बीच में छोड़ वापस लौट गए. ऐसे में रहाणे ने टीम की कमान संभाली और चोटिल खिलाड़ियों को लेकर ऑस्ट्रिलिया को उसके घर पर सीरीज में धूल चटाया.
अजिंक्य रहाणे को उनकी बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है लेकिन बतौर कप्तान रिकॉर्ड शानदार रहा. उन्हें लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी करने का मौका नहीं मिला. जितने भी मैचों में उन्होंने टीम की कमान संभाली, उसमें उनका रिकॉर्ड शानदार रहा. रहाणे ने भारत के लिए 6 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिसमें टीम ने 4 मुकाबले जीते और 2 ड्रॉ खेले, जबकि एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा.

रहाणे की कप्तानी का सबसे यादगार अध्याय 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रहा. एडिलेड टेस्ट में भारत के महज 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद नियमित कप्तान विराट कोहली बेटी के जन्म की वजह से भारत लौट गए थे. इसके बाद टीम की जिम्मेदारी रहाणे के कंधों पर आई और उन्होंने अपनी शांत नेतृत्व क्षमता से पूरी टीम का आत्मविश्वास लौटाया. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए दूसरे टेस्ट में रहाणे ने शानदार शतक जड़ा और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई. इसके बाद चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने सिडनी टेस्ट ड्रॉ कराया और फिर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली.
यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी विदेशी टेस्ट सफलताओं में गिनी जाती है. रहाणे की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत उनका शांत स्वभाव, खिलाड़ियों पर भरोसा और मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसले लेने की क्षमता रही. उन्होंने युवा खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका दिया और टीम के भीतर सकारात्मक माहौल बनाए रखा. कमजोर मानी जा रही चोटिल खिलाड़ियों की फौज के साथ मिलकर रहाणे ने इतिहास रच दिया.
सबसे बड़ी उपलब्धि: 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराकर ऐतिहासिक सीरीज जीत. रहाणे आज भी उन चुनिंदा भारतीय टेस्ट कप्तानों में शामिल हैं जिन्होंने पांच या उससे अधिक टेस्ट मैचों में कप्तानी करते हुए एक भी मुकाबला नहीं गंवाया. उनकी यह उपलब्धि बताती है कि नेतृत्व केवल आक्रामक अंदाज से नहीं, बल्कि धैर्य, भरोसे और सही फैसले से भी किया जाता है. यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट इतिहास में अजिंक्य रहाणे को सबसे सफल और यादगार स्टैंड-इन टेस्ट कप्तानों में गिना जाता है.

