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    Home»हरियाणा»क्या है अम्बाला छावनी फ्री होल्ड पॉलिसी? जिसके लिए अपनी ही सरकार से भिड़ने को तैयार मंत्री अनिल विज
    हरियाणा

    क्या है अम्बाला छावनी फ्री होल्ड पॉलिसी? जिसके लिए अपनी ही सरकार से भिड़ने को तैयार मंत्री अनिल विज

    प्रमोद रिसालियाBy प्रमोद रिसालियाAugust 7, 2026No Comments8 Mins Read
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    अंबाला. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अग्रवाल धर्मशाला, अम्बाला छावनी में भाजपा कार्यकर्ताओं से बैठक की. बैठक के दौरान अम्बाला छावनी को फ्री होल्ड करने के लिए सरकार द्वारा नई बनाई पॉलिसी पर खुलकर चर्चा की. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि आज बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है और आप के माध्यम से अम्बाला की जनता से इसकी बात करना बहुत जरूरी है.

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि पूर्व विधायक देवेंद्र बंसल के चुनाव के बाद से अम्बाला छावनी को फ्री होल्ड करो की बात जगह-जगह उठाई जाती रही है. यह बात अदालतों में भी चली गई, कई केसों में जजों ने टिप्पणियां की और अभी एक कब्जे के मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए कि अम्बाला छावनी की “फ्री होल्ड पॉलिसी” को बनाया जाए.

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि फ्री होल्ड का मसला है यह केवल अम्बाला छावनी सदर क्षेत्र का है, दूसरा यह सदर क्षेत्र 5 फरवरी 1977 से पहले कैंटोनमेंट का हिस्सा था, यहां नगर पालिका नहीं बल्कि कैंटोनमेंट बोर्ड था. 5 फरवरी 1977 को जब बंसीलाल रक्षामंत्री थे, उन्होंने 1063 एकड़ जगह कैंटोनमेंट बोर्ड से काटकर नगर पालिका बना दिया और उसकी कुछ शर्ते भी लगाई गई कि भारत सरकार की जो जमीन है वह हरियाणा सरकार की हो जाएगी, छावनी बोर्ड की प्रापर्टी नगर पालिका की हो जाएगी. बशर्ते की हरियाणा सरकार सेना की मर्जी की 150 एकड़ जमीन निशुल्क खरीदकर सेना को देगी.

    उन्होंने कहा कि 5 फरवरी 1977 को यह एक्सीसर एग्रीमेंट हुआ था और सन 2000 तक किसी सरकार ने यह कोशिश नहीं की कि हम 150 एकड़ जमीन सेना को लेकर दें. सन् 2000 में जब बंसीलाल मुख्यमंत्री थे तब मैनें उन्हें कहकर 150 एकड़ जमीन सेना को लेकर दी ताकि जो भारत सरकार की जमीन है वह हरियाणा सरकार की हो जाए और यह हरियाणा सरकार की हुई भी. यहां पर रजिस्ट्रयां कराने, नक्शे पास कराने, पार्टिशन कराने, लोन लेने के लिए लोग बहुत दिक्कत झेलते थे क्योंकि वह फ्री होल्ड का मासला डाला गया जबकि उससे पहले भी रजिस्ट्रियां होती थी और कोई दिक्कत नहीं थी. मगर पूर्व विधायक देवेंद्र बंसल के बाद वो रजिस्ट्रियां मलबे की होने लगी. हर रजिस्ट्री पर लिखा है कि जो ढांचा है इसकी रजिस्ट्री होगी, जमीन की रजिस्ट्री नहीं होगी क्योंकि जमीन की मालिक तो सरकार है. इसलिए रजिस्टरी होगी तो सिर्फ ढांचे या मलबे की होगी.

    नतीजतन बैंकों ने लोन देना बंद कर दिया और यहां के एक महापुरूष ने अम्बाला की किसी प्रापर्टी को बैंक के नाम गरवी रखकर बैंक से बहुत बड़ा लोन ले लिया और लोन चुकाया नहीं. जब लोन नहीं चुकाया तो बैंक उसकी बिल्डिंग की कुर्की करने आया, जब कुर्की करने आया तो देखा कि वहां बिल्डिंग नहीं केवल खाली जमीन थी, जब बैंक जमीन की कुर्की करने लगा तो सरकार ने कहा कि जमीन तो हमारी है व्यक्ति की नहीं है. इससे अधिकारियों में बड़ा भय ला दिया जिसके बाद यह लिखना ही बंद कर दिया. अब जितने भी अर्जी नवीस (डीड राइटर) है वह यहीं लिखते है कि जो ढांचा है इसकी रजिस्ट्री की गई है. इसकी वजह से बैंक लोन नहीं देते, नक्शा पास नहीं होता, प्रापर्टी का विभाजन नहीं होता. अब जब हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया कि अम्बाला छावनी की लैंड पॉलिसी बनाई जाए तो मुख्य सचिव ने इसमें हामी भरी की हम यह पॉलिसी बना लेंगे. इसके बाद अब हरियाणा सरकार ने लैंड पॉलिसी बना ली.

    लाख जोर लगाने के बावजूद फ्री होल्ड पॉलिसी का एजेंडा डेफर करायाः विज

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अब जो लैंड पॉलिसी बनाई गई वह गत दिनों कैबिनेट मीटिंग के एजेंडे में आ गई. हालांकि पहले दिन जो एजेंडा पेश हुआ उसमें वह दर्ज नहीं थी, मगर दूसरे दिन सुबह जब मीटिंग शुरू हुई तो एजेंडे में 17 नंबर पर अम्बाला छावनी लैंड/फ्री होल्ड पॉलिसी दर्ज थी. अधिकारियों ने मीटिंग में जब यह पॉलिसी पढ़नी शुरू की और इसे पास करने का प्रस्ताव रखा तो मैनें कहा “मुख्यमंत्री जी अम्बाला छावनी की लैंड पॉलिसी बनाई जा रही है और वह अम्बाला छावनी के नुमाइंदे है, उनसे एक बार भी इस बारे नहीं पूछा गया, वह एक बार नहीं सात बार अम्बाला छावनी से विधायक है, इस पॉलिसी में क्या है क्या नहीं है, अम्बाला के लोग क्या चाहते है इसपर एक बार भी मुझसे नहीं पूछा गया”. इसपर मुख्य सचिव ने इस एजेंडे को पास करने को कहा, मगर उन्होंने इस एजेंडे पर अड़ते हुए एजेंडे को डेफर करने को कहा. इसपर उन्होंने मुख्यमंत्री जी को कहा कि “आप इस मसले पर मीटिंग बुला लो, मीटिंग में मुझे बुला लो और इसमें उन सभी लोगों शामिल करो जिन्होंने पॉलिसी बनाई, इसके बाद सभी पक्षों को सुना जाए और फिर निर्णय लिया जाए”. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि उस दिन उन्होंने इस एजेंडे को पास नहीं होने दिया और अधिकारियों के लाख जोर लगाने के बावजूद एजेंडे को डेफर कराया. उन्होंने कहा कि यदि यह एजेंडा उस मीटिंग में पास हो जाता तो आज सड़क-सड़क पर अम्बाला छावनी के लोग धक्के खा रहे होते जिस प्रकार से यह पॉलिसी बनाई गई है.


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    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने पॉलिसी के मुख्य बिंदु बताए

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि उन्होंने अपने वकीलों  के साथ बाद में पॉलिसी को स्टडी किया जो बनाई गई है. इस पॉलिसी में जो मुख्य बात बताई गई है उसमें जिस आदमी को जितनी जमीन अलॉट हुई है उसे कलेक्टरेट पर रजिस्टरी करानी होगी. उदाहरण के तौर पर किसी कि पास हजार गज की जमीन है और 60 हजार कलेक्टरेट रेट है तो उसे छह करोड़ रुपया रजिस्टरी के लिए जमा कराना होगा. चाहे 100 गज, चाहे 200 गज, चाहे 500, चाहे 1000 गज या 2000 हजार गज का मकान है सबको कलेक्टरेट के हिसाब से पैसे जमा कराने होंगे. आगे पॉलिसी में लिखा है कि जो पैसे जमा नहीं कराएगा उसका मकान सील करके सरकार उसे अपने कब्जे में लेकर स्वयं बेच देगी. सरकार आगे उस मकान को किसी को भी बेच सकती है. इसके अलावा व्यक्ति को रजिस्टरी कराने के लिए जमीन के ओरिजनल डाक्यूमेंट (मूल दस्तावेज) जमा कराने होंगे. उन्होंने कहा कि ओरिजनल डाक्यूमेंट डेढ़ सौ साल पहले किसी के परदादे के समय के होंगे, पहले बंटवारे घर के बुजुर्ग जुबानी ही बंटवारा कर देते थे, अब वह कागज कहां से लाए जाएं जबकि पॉलिसी में लिखा है कि ओरिजनल कागज लाकर देने पड़ेंगे.

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि रजिस्टरी कराने के लिए 25 प्रतिशत राशि पोर्टल पर आवेदन करते समय ही देनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि बाजारों में उनसे लोग यह बहस करते थे कि अम्बाला छावनी को फ्री होल्ड कराओ, उन्होंने तभी कहा था कि लोगों को दिक्कत होती जब फ्री होल्ड का चेप्टर खुलेगा. 25 प्रतिशत राशि जमा कराने के एक वर्ष के भीतर सारा पैसा जमा कराना होगा और जो नहीं जमा कराएगा उसका सारा सामान निकाल बाहर फेंक दिया जाएगा व मकान पर ताला लगा दिया जाएगा व यह प्रापर्टी सरकार की हो जाएगी. इसी तरह जो फ्री होल्ड कराने के लिए पोर्टल पर अप्लाई नहीं करता तो एक वर्ष बाद उस मकान पर ताला लगाकर उससे मार्केट रेट पर किराया लिया जाएगा. इसके अलावा कब्जा करने वालों से भी पैसा लिया जाएगा. इसके अलावा इस पॉलिसी में बहुत सारे लीगल प्वाइंट हैं.

    सरकार के साथ लड़ना पड़ा तो जनता के साथ : अनिल विज

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कार्यकर्ताओं से कहा कि हमारे सामने तीन रास्ते हैं जिनमें पहला रास्ता है कि “उन्हें उम्मीद है कि आगे होने वाली मीटिंग में वह इस पॉलिसी में जो गलत चीजें है उन्हें रद्द करवा देंगे क्योंकि उन्हें अम्बाला छावनी का इतिहास शुरू से आखिरी तक पता है”. दूसरी बात “यदि उनकी बात नहीं मानते तो हमें इस पॉलिसी को कोर्ट में चैलेंज करना पड़ेगा, उसके लिए शहर में बड़ी समिति बननी चाहिए जो दिलचस्पी लेकर लड़े” और तीसरी जो सबसे खतरनाक बात आपसे कहने जा रहा हूं कि “हो सकता है कि हमें सरकार के साथ भी लड़ना पड़े, मैं आज आपको यह विश्वास देने के लिए खड़ा हूं कि अगर अम्बाला छावनी की जनता को अपना जायज काम कराने के लिए भी सरकार के साथ लड़ना पड़ा तो अनिल विज सरकार के साथ नहीं, बल्कि अम्बाला छावनी की जनता के साथ होगा, लड़ेंगे, मरेंगे, धरने, जुलुस जलसे जो करने होंगे अनिल विज तुम्हारे साथ बैठा होगा”.

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह बहुत बड़ा खतरा है इसलिए आप सभी को विश्वास में लेना जरूरी है. अम्बाला छावनी निवासियों से कहा कि एक बात गांठ बांध लेना कि यह लड़ाई सदर क्षेत्र की नहीं पूरी अम्बाला छावनी की है और सभी को इसमें मिलकर लड़ना पड़ेगा. उन्हें भरोसा है कि वह इसे ठीक करा लेंगे.  वहीं, आज बैठक के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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    प्रमोद रिसालिया
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    प्रमोद रिसालिया एक अनुभवी राजनीतिक पत्रकार हैं, जो 'भारत खबर' वेब पोर्टल से जुड़े हुए हैं। उन्हें जमीनी राजनीति की बारीक समझ और तेज विश्लेषण के लिए जाना जाता है। प्रमोद लगातार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करते हैं। उनकी लेखनी में तथ्यों की सटीकता और जन सरोकारों की गहराई साफ झलकती है। राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ वे चुनावी विश्लेषण और सत्ता के समीकरणों पर भी पैनी नजर रखते हैं।

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