अमृतसर. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर ताल ठोकने के बड़े ऐलान के ठीक बाद, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक और बड़ा सियासी दांव चल दिया है. चिराग पासवान अब पंजाब के राजनीतिक समर में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं. अपने दो दिवसीय पंजाब दौरे के दौरान चिराग ने न केवल अमृतसर स्थित पवित्र श्री हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका, बल्कि जालंधर में दलित और शोषित समाज के बड़े प्रतीकों के दर पर हाजिरी लगाकर सूबे के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है. कुछ दिन पहले महाराष्ट्र दौरे के दौरान गुरुद्वारे में जाने और अब पंजाब की धरती पर सिखों की पारंपरिक पगड़ी पहनकर अपनी सिख विरासत का संकल्प दोहराने वाले चिराग के इस कदम ने आम आदमी पार्टी, भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस जैसे बड़े खिलाड़ियों को चौंका दिया है.
चिराग पासवान ने अपने पंजाब दौरे की शुरुआत बेहद आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ की. अमृतसर पहुंचने के बाद वे सबसे पहले श्री हरमंदिर साहिब गए, जहां उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के दरबार में माथा टेका. इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक जलियांवाला बाग पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम में प्राणों का बलिदान देने वाले अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहीदों के सपनों का भारत वही होगा, जहां एकता हमारी पहचान होगी और राष्ट्र सर्वोपरि हमारा संकल्प होगा.
आंबेडकर, वाल्मीकि और डेरा सचखंड बल्लां में हाजिरी
पंजाब की राजनीति में लगभग 32 प्रतिशत से अधिक दलित यानी अनुसूचित जाति मतदाता हैं, जो देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक हैं. चिराग पासवान ने जालंधर पहुंचकर सीधे इसी कोर वोटर बेस पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति दिखाई. चिराग ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया. फिर भगवान वाल्मीकि के दर पर शीश नवाजा. समरसता और मानवता के प्रतीक भगवान वाल्मीकि की प्रतिमा पर नमन कर उन्होंने सामाजिक एकता का संदेश दिया. फिर पंजाब के दोआबा क्षेत्र में दलित सिखों और रविदासी समाज के सबसे बड़े धार्मिक केंद्र डेरा सचखंड बल्लां में संतों के सान्निध्य में पहुंचकर चिराग ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है, क्योंकि इस डेरे का पंजाब की कई दर्जन सीटों पर सीधा प्रभाव है.
क्या पंजाब में एनडीए गठबंधन को चौंकाएगी एलजेपी?
चिराग पासवान वर्तमान में केंद्र की मोदी सरकार में एक मजबूत सहयोगी हैं, लेकिन वे अपनी पार्टी का विस्तार बिहार से बाहर पूरे देश में करना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के बाद अब वे पंजाब और उत्तराखंड जैसी जगहों पर अपनी पार्टी की जड़ें जमा रहे हैं. पिता रामविलास पासवान के सपनों का विस्तार नागालैंड और झारखंड की तरह पंजाब में भी पार्टी के जनप्रतिनिधि खड़े करना चाह रहे हैं.
चिराग पासवान जानते हैं कि पंजाब में अकाली दल और भाजपा के अलग होने के बाद से एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की खींचतान के बीच अगर चिराग पासवान अपने पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान के पुराने दलित आधार को पंजाब में पुनर्जीवित करने में कामयाब रहते हैं, तो वे आगामी चुनावों में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं. फिलहाल उनका यह दौरा सिर्फ धार्मिक या आध्यात्मिक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीन तैयार करने का एक बेहद सघन और रणनीतिक प्रयास है. अब देखना यह है कि भाजपा के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चिराग आने वाले दिनों में क्या रुख अपनाते हैं.
