Kanwar Yatra 2026 Travel Advisory: महादेव का प्रिय सावन का महीना शुरू हो चुका है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। सावन के पावन महीने के साथ ही गुरुवार से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है। हर साल लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र घाटों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस साल भी लाखों कांवड़ियों के जाने की उम्मीद है। इसे देखते हुए दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार समेत पूरे कांवड़ मार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। प्रशासन ने 30 जुलाई से 12 अगस्त तक कई एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक बंद किया गया है या रूट डायवर्जन लागू किया गया है। अगर आप इन दिनों दिल्ली-एनसीआर से उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड की ओर यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले यह ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर पढ़ लें।
दिल्ली-गाजियाबाद रोड पर भारी वाहनों की एंट्री बंद
30 जुलाई की सुबह 8 बजे से दिल्ली, गाजियाबाद और आगे कांवड़ मार्गों पर ट्रक, ट्रॉली, कैंटर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन के अनुसार 5 अगस्त से बस, कार, टैम्पो और अन्य हल्के वाहनों पर भी कई मार्गों पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। ऐसे में वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना होगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे रहेगा कांवड़ियों के लिए रिजर्व
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को इस बार कांवड़ यात्रा के लिए विशेष रूप से रिजर्व किया गया है। 30 जुलाई से यहां ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है। फिलहाल केवल भारी वाहनों को दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा है, लेकिन 7 अगस्त से 12 अगस्त तक उत्तर प्रदेश वाले हिस्से में सभी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। इस अवधि में एक्सप्रेसवे पर केवल कांवड़ यात्री ही आवाजाही कर सकेंगे।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पूरी तरह खुला रहेगा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को सामान्य वाहनों के लिए खुला रखा गया है। इस एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं होगी, जिससे लंबी दूरी तय करने वाले वाहन इसका उपयोग कर सकेंगे। हालांकि अन्य मार्गों से ट्रैफिक डायवर्ट होने के कारण यहां वाहनों का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
इन रूट पर भी आवाजाही रहेगी प्रभावित
गाजियाबाद क्षेत्र में तीन प्रमुख कांवड़ मार्गों पर सभी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। 37 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रोड (लोनी तक), कादराबाद से सीमापुरी (दिल्ली सीमा) तक लगभग 39 किलोमीटर का मार्ग और करीब 50 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर आवाजाही प्रभावित रहेगी। हरिद्वार, मुरादाबाद, अमरोहा और लखनऊ की ओर जाने वाले वाहनों को एनएच-9, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से भेजा जाएगा।
एनएच-34 पर भी रहेगा विशेष ट्रैफिक प्लान
दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे (NH-34) कांवड़ यात्रा का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है। यह सड़क दिल्ली से गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार तक जाती है। प्रशासन ने 4 अगस्त से 12 अगस्त तक इस हाईवे पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस दौरान मार्ग पर मुख्य रूप से कांवड़ियों और आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही अनुमति होगी।
सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर किए गए इंतजाम
गाजियाबाद से हरिद्वार तक करीब 126 किलोमीटर लंबे कांवड़ मार्ग को 157 बीट और 502 स्थायी ड्यूटी पॉइंट में विभाजित किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 3,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 100 पुलिस रिस्पॉन्स वाहन (PRV), 16 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), 8 वॉच टावर, 10 कंट्रोल रूम, सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे और टेथर्ड ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गाजियाबाद में करीब 300 कांवड़ शिविर लगाए गए हैं। हरिद्वार तक पहुंचते-पहुंचते इन शिविरों की संख्या और बढ़ जाएगी। यहां भोजन, विश्राम, प्राथमिक उपचार और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
यदि आपको दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की या हरिद्वार की ओर यात्रा करनी है, तो पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें। जहां तक संभव हो कांवड़ मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें, क्योंकि भीड़ बढ़ने पर प्रशासन समय-समय पर ट्रैफिक प्लान में बदलाव कर सकता है। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए सबसे जरूरी होगा।

